
छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए विष्णुदेव साय सरकार एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। पीएससी (PSC) और व्यापमं (Vyapam) की परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक और नकल को जड़ से खत्म करने के लिए विधानसभा सत्र में ‘छत्तीसगढ़ लोक परीक्षा अधिनियम’ पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट कर दिया है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अब प्रदेश में सबसे सख्त कानून होगा। यह फैसला हाल के वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में हुए विवादों और सीबीआई जांच के बीच लिया गया है।
संगठित नकल माफियाओं के लिए 10 साल की जेल
नए कानून के तहत उन गिरोहों और संस्थाओं पर सबसे ज्यादा प्रहार किया गया है जो संगठित रूप से पेपर लीक करवाते हैं। अगर कोई सेवा प्रदाता संस्थान, कंपनी या फर्म परीक्षा में गड़बड़ी की दोषी पाई जाती है, तो उसे न्यूनतम 5 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की जेल हो सकती है। इसके साथ ही एक करोड़ रुपये तक के भारी-भरकम जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। कानून को इतना सख्त बनाया गया है कि अगर कोई गिरोह बार-बार अपराध करता है, तो उसे उम्रकैद तक की सजा दी जा सकेगी।
नकल करने वाले छात्र 5 साल तक नहीं दे पाएंगे परीक्षा
केवल नकल माफिया ही नहीं, बल्कि अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले परीक्षार्थियों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। भर्ती परीक्षा में नकल करते पकड़े जाने पर छात्र का रिजल्ट तो रोका ही जाएगा, साथ ही उसे अगले 3 से 5 साल तक प्रदेश की किसी भी सरकारी भर्ती परीक्षा में बैठने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। गंभीर मामलों में छात्रों को 1 से 5 साल की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। दोबारा दोषी पाए जाने पर जेल की अवधि 10 साल तक बढ़ाई जा सकती है।
कोचिंग संस्थानों की झूठी गारंटी पर लगेगा ताला
प्रदेश के कई कोचिंग संस्थान युवाओं को सरकारी नौकरी की ‘गारंटी’ देकर लुभाते हैं। नए अधिनियम में इस पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है। अब कोई भी कोचिंग संस्थान लोक परीक्षा में सफलता की शत-प्रतिशत गारंटी देकर छात्रों को गुमराह नहीं कर सकेगा। चयन से जुड़ी कोई भी भ्रामक जानकारी या झूठा विज्ञापन प्रकाशित करना अब अपराध की श्रेणी में आएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक के कड़े प्रावधान किए जा रहे हैं।
शैक्षणिक और तकनीकी परीक्षाएं दायरे से बाहर रहेंगी
सरकार ने यह साफ कर दिया है कि यह नया सख्त कानून केवल सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली भर्ती परीक्षाओं पर लागू होगा। स्कूल-कॉलेज की शैक्षणिक परीक्षाएं, तकनीकी डिग्री या अन्य व्यावसायिक योग्यता प्राप्त करने के लिए होने वाली परीक्षाओं को इस दायरे से बाहर रखा गया है। इन परीक्षाओं में नकल के मामलों को पुराने ‘छत्तीसगढ़ लोक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम अधिनियम, 2008)’ के तहत ही निपटाया जाएगा। इस वर्गीकरण का उद्देश्य केवल भर्ती परीक्षाओं में होने वाले बड़े भ्रष्टाचार को लक्षित करना है।
पुराने विवादों और हाईटेक नकल ने बढ़ाई चिंता
बीते कुछ सालों में छत्तीसगढ़ की भर्ती परीक्षाएं लगातार सवालों के घेरे में रही हैं। साल 2022 की पीएससी परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। वहीं, 2025 में व्यापमं की पीडब्ल्यूडी भर्ती परीक्षा के दौरान बिलासपुर में हाईटेक तरीके से नकल का मामला सामने आया था, जिससे प्रशासन की काफी किरकिरी हुई थी। इन घटनाओं से सबक लेते हुए सरकार अब एक ऐसा कानूनी ढांचा तैयार कर रही है जिससे परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाई जा सके।



