
छत्तीसगढ़ सरकार ने राजधानी रायपुर और आसपास के बड़े शहरों जैसे दुर्ग, भिलाई और नवा रायपुर को मिलाकर ‘स्टेट कैपिटल रीजन’ (SCR) विकसित करने का बड़ा फैसला लिया है। इस योजना का सबसे अहम हिस्सा रायपुर से दुर्ग के बीच मेट्रो रेल सेवा शुरू करना है। सरकार का मानना है कि इन शहरों के बीच रोजाना लाखों लोग सफर करते हैं, जिन्हें मेट्रो के आने से एक तेज और सुरक्षित विकल्प मिलेगा। हाल ही में विधानसभा में ‘राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण विधेयक-2025’ पारित होने के बाद इस प्रोजेक्ट को नई रफ्तार मिली है।
बजट में प्रावधान और डीपीआर तैयार करने की कवायद शुरू
मेट्रो परियोजना को हकीकत में बदलने के लिए साय सरकार ने शुरुआती कदम उठा लिए हैं। साल 2024-25 के बजट में इस प्रोजेक्ट के सर्वे और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए 5 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। इस फंड का उपयोग तकनीकी बारीकियों को समझने और रूट मैप तैयार करने में होगा। डिप्टी सीएम अरुण साव ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ में भी अब मेट्रो युग की शुरुआत होने जा रही है। इससे न केवल सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा।
2031 तक 50 लाख की आबादी को ध्यान में रखकर तैयारी
सरकार के अनुमान के मुताबिक, साल 2031 तक रायपुर राजधानी क्षेत्र की आबादी 50 लाख को पार कर जाएगी। इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए मौजूदा सड़क परिवहन पर्याप्त नहीं होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन किया जा रहा है, जो दिल्ली (NCR) या हैदराबाद की तर्ज पर काम करेगा। इसके लिए एक अलग ‘राजधानी क्षेत्र विकास निधि’ भी बनाई जाएगी। प्राधिकरण को बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए विशेष उपकर (Cess) लगाने का भी अधिकार होगा, ताकि फंड की कमी न हो।
प्राधिकरण का ढांचा और पुरानी योजनाओं पर रुख
मेट्रो और एससीआर प्रोजेक्ट के संचालन के लिए एक शक्तिशाली कार्यकारी समिति बनाई जाएगी। इस समिति में नगर एवं ग्राम निवेश, वित्त विभाग के बड़े अधिकारियों के साथ रायपुर और दुर्ग जिले के कलेक्टर भी सदस्य होंगे। इससे पहले भी रायपुर-दुर्ग के बीच मेट्रो को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन मौजूदा सरकार इसे एक नए और वैज्ञानिक ढंग से जमीन पर उतारने की कोशिश कर रही है। सरकार का लक्ष्य ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को मेट्रो रूट के जरिए आपस में जोड़ना है।



