
बिलासपुर: प्रदेशभर की खराब सड़कों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। स्वतः संज्ञान में चल रही इस सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि सड़कों की मरम्मत और निर्माण में टेंडर प्रक्रिया और तकनीकी जांच के नाम पर समय बर्बाद किया जा रहा है, जो सही नहीं है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान शासन और एनएचएआई ने अपना जवाब पेश किया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे (NH-130) की बदहाली पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूछा कि यह सड़क कब तक सुधरेगी। कोर्ट ने कहा कि बार-बार शपथ पत्र देने से समस्या हल नहीं होगी। एनएचएआई सिर्फ कागजी रिपोर्ट देकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
सरकार का पक्ष
शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि रतनपुर-सेंदरी रोड का काम लगभग पूरा हो चुका है। रायपुर रोड का 70 प्रतिशत निर्माण हो गया है और अगले 15 दिनों में शेष कार्य पूरा कर लिया जाएगा। साथ ही बताया गया कि पेण्ड्रीडीह से नेहरू चौक तक का मार्ग स्टेट पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत आता है, जिसकी जांच के बाद उसे फिर से बनाया जाएगा। रतनपुर-केंदा मार्ग की खराब स्थिति पर कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी सचिव से शपथ पत्र मांगा है।
राख फैलने पर भी जताई नाराजगी
रायपुर-बिलासपुर मार्ग पर पावर प्लांटों की राख फैलने की समस्या पर भी हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। इस संबंध में कोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है।
फुट ओवरब्रिज निर्माण की जानकारी
एनएचएआई की ओर से कहा गया कि तुर्काडीह, सेंदरी, रानीगांव, मलनाडीह और बेलतरा में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए फुट ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। पहले इसकी अनुमानित लागत 17.95 करोड़ थी, जो घटकर 11.38 करोड़ हो गई है। संयुक्त जांच पूरी हो चुकी है और टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
अधूरे काम पर सवाल
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बिलासपुर की पेण्ड्रीडीह बाईपास से नेहरू चौक तक की सड़क का निर्माण कार्य अप्रैल में मंजूर हो गया था, लेकिन आज तक कोई प्रगति नहीं हुई। इसी तरह रायपुर के धनेली एयरपोर्ट रोड का काम भी अधूरा पड़ा है।



