
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का अभियान अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। 15 नवंबर 2025 से शुरू हुई यह प्रक्रिया 31 जनवरी 2026 को समाप्त होने वाली है। सरकार के पास अब सिर्फ 4 दिन का समय शेष है। ऐसे में प्रदेश के लाखों किसानों की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि क्या सरकार पिछले वर्षों की तरह इस बार भी खरीदी की अंतिम तारीख आगे बढ़ाएगी? हालांकि, सहकारिता मंत्री केदार कश्यप के ताजा बयान ने फिलहाल इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
सहकारिता मंत्री ने साफ की सरकार की मंशा
मीडिया से चर्चा करते हुए सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने स्पष्ट किया कि फिलहाल धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाने की कोई स्थिति नजर नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में बहुत अधिक आवश्यकता महसूस हुई तो विचार किया जा सकता है, लेकिन अभी तक जितने किसानों ने पंजीकरण कराया था, उनमें से अधिकांश अपना धान बेच चुके हैं। मंत्री के इस रुख से संकेत मिल रहे हैं कि 31 जनवरी के बाद मंडियों में धान की आवक बंद हो सकती है।
बिचौलियों पर नकेल और अवैध धान की जब्ती
जब विपक्ष ने कम खरीदी को लेकर सवाल उठाए, तो मंत्री कश्यप ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार केवल वास्तविक धान ही खरीद रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सीमावर्ती राज्यों से अवैध धान लाकर खपाया जाता था, जिसे इस बार बिचौलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रोका गया है। प्रदेश भर में हजारों क्विंटल अवैध धान जब्त किया गया है और निगरानी के लिए बॉर्डर पर कड़े इंतजाम किए गए हैं। यही वजह है कि आंकड़ों में केवल छत्तीसगढ़ के किसानों का वास्तविक उत्पादन ही दिख रहा है।
सरकारी खजाने से 23,448 करोड़ का रिकॉर्ड भुगतान
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 13 जनवरी 2026 तक राज्य के 17,77,419 किसानों ने अपना धान समितियों में बेच दिया है। अब तक कुल 105.14 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी की जा चुकी है। इसके बदले में सरकार ने किसानों के बैंक खातों में सीधे 23,448 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर की है। यह अब तक के इतिहास में 13 जनवरी तक की गई सबसे बड़ी भुगतान राशि है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान आई है।
पिछले वर्षों की तुलना में इस बार की खरीदी अधिक
साल 2020-21 और 2021-22 के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान सरकार की रफ्तार काफी तेज रही है। 2020-21 में इसी अवधि तक केवल 72.15 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था, जबकि इस साल यह आंकड़ा 105.14 लाख मीट्रिक टन को पार कर गया है। किसानों की संख्या और भुगतान राशि, दोनों ही मोर्चों पर इस बार की खरीदी पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ रही है। सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि मान रही है।
विपक्ष का हमला: ‘कई किसान अब भी कतार में’
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी लगातार सरकार की घेराबंदी कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि सर्वर में तकनीकी खराबी और बारदाने की कमी के कारण कई सीमांत किसान अब तक केंद्रों तक नहीं पहुंच पाए हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए खरीदी की तारीख कम से कम 15 फरवरी तक बढ़ाई जाए। विपक्ष का कहना है कि अगर समय नहीं बढ़ा, तो छोटे किसान मजबूरी में अपना धान बिचौलियों को सस्ते दाम पर बेचने को मजबूर होंगे।
आने वाले 4 दिनों के लिए प्रशासन अलर्ट
31 जनवरी की समय-सीमा को देखते हुए सभी उपार्जन केंद्रों पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी गई है। जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि अंतिम दिनों में भीड़ को नियंत्रित करें और यह सुनिश्चित करें कि जिन किसानों के पास टोकन है, उनका धान हर हाल में तौला जाए। बिचौलियों की सक्रियता रोकने के लिए उड़नदस्तों की टीमें लगातार मंडियों का दौरा कर रही हैं।
- कुल खरीदे गए धान का लक्ष्य: 160 लाख मीट्रिक टन (अनुमानित)
- अब तक की खरीदी: 105.14 लाख मीट्रिक टन
- अंतिम तिथि: 31 जनवरी 2026
- कुल लाभार्थी किसान: 17.77 लाख (13 जनवरी तक)



