
CG Naib Tehsildar Strike: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर में हुए राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव ने अब पूरे प्रदेश में एक बड़ा रूप अख्तियार कर लिया है। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों द्वारा नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के साथ की गई कथित मारपीट के विरोध में राज्य के प्रशासनिक अधिकारी लामबंद हो गए हैं। आरोपी विधायक की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार से छत्तीसगढ़ के सभी 536 तहसीलदार और नायब तहसीलदार अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इस सामूहिक अवकाश और कलमबंद आंदोलन के कारण पूरे प्रदेश के तहसील कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ है और जमीनी स्तर पर राजस्व विभाग का पूरा कामकाज ठप हो गया है।
SDM के सामने हुई थी अधिकारी की पिटाई, विधायक और समर्थकों पर दर्ज हुआ मुकदमा
इस पूरे विवाद की शुरुआत 27 मई की शाम राजापुर उप तहसील कार्यालय के पास हुई थी। पीड़ित नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी का आरोप है कि विधायक रामकुमार टोप्पो ने उन्हें बात करने के लिए राजापुर चौराहे पर बुलाया था। वे खुद सुरक्षा और मध्यस्थता के लिए सीतापुर एसडीएम फागेश सिन्हा के साथ वहां पहुंचे थे। आरोप है कि बातचीत के दौरान अचानक विधायक के समर्थकों ने उन्हें घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी, जिसके बाद खुद विधायक ने भी उन पर हाथ उठाया। इस घटनाक्रम को लेकर मौके पर मौजूद एसडीएम फागेश सिन्हा ने भी पुष्टि की है कि उनके सामने ही इस हिंसक वारदात को अंजाम दिया गया, जिसके बाद पुलिस ने विधायक और उनके 10 समर्थकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

विधायक समर्थकों ने भी खोला मोर्चा, एफआईआर वापस लेने की मांग को लेकर थाने का घेराव
इधर दूसरी तरफ प्रशासनिक कार्रवाई से नाराज भाजपा विधायक के समर्थकों ने भी पुलिस और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार की शाम भारी संख्या में विधायक समर्थक और स्थानीय ग्रामीण एकजुट होकर सीतापुर थाने के सामने पहुंच गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। समर्थकों का कहना है कि विधायक के खिलाफ राजनीतिक द्वेष के चलते झूठा मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से इस एफआईआर को तुरंत निरस्त करने की मांग की है। क्षेत्र में बढ़ते जनाक्रोश और बड़े प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए स्थानीय पुलिस को हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है।
कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भेजा ज्ञापन, सुरक्षा को लेकर जताई चिंता
अधिकारियों के साथ सरेआम हुई इस अभद्रता को लेकर छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए है। संघ की सरगुजा इकाई के पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से एकत्रित होकर राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राज्यपाल रमेन डेका के नाम जिला प्रशासन को एक सख्त ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से अधिकारियों ने साफ कहा है कि जब तक जनप्रतिनिधि और उनके गुंडों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। संघ के इस आह्वान के बाद राजस्व अधिकारियों के साथ-साथ कलेक्ट्रेट और तहसील के लिपिक वर्गीय कर्मचारी भी हड़ताल के समर्थन में उतर आए हैं।
काली पट्टी बांधकर दफ्तरों के बाहर बैठे अधिकारी, राजमोहिनी भवन में तैयार हो रही आगे की रणनीति
विरोध प्रदर्शन के पहले दिन सरगुजा संभाग सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में राजस्व अधिकारियों ने अपने हाथों पर काली पट्टी बांधकर कार्यस्थल के बाहर मौन प्रदर्शन किया। हड़ताल पर बैठे अधिकारियों का कहना है कि इस आंदोलन का मकसद केवल एक घटना का विरोध करना नहीं है, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रशासनिक या राजस्व अधिकारी के साथ इस तरह की गुंडागर्दी और दुर्व्यवहार को रोकना है। आंदोलन को और प्रभावी बनाने के लिए कनिष्ठ अधिकारियों का एक बड़ा दल अंबिकापुर के राजमोहिनी देवी भवन में एकत्रित हुआ है, जहां आगामी दिनों की रणनीति और आंदोलन को पूरे प्रदेश में फैलाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
जमीन के दस्तावेज पर दस्तखत को लेकर शुरू हुआ था विवाद, दोनों पक्षों पर दर्ज है केस
यह पूरा हाई-प्रोफाइल विवाद असल में एक जमीन के शाख शोध प्रमाण पत्र (ऋण पुस्तिका) पर हस्ताक्षर कराने को लेकर शुरू हुआ था। 27 मई को सीतापुर विधायक की बड़ी बहन सीमा धनका इस सरकारी दस्तावेज पर दस्तखत कराने राजापुर उप तहसील दफ्तर पहुंची थीं। महिला का आरोप है कि वहां तैनात नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने उनकी फाइल को टेबल से नीचे फेंक दिया और उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें केबिन से बाहर निकाल दिया। इस बदसलूकी की शिकायत पर पुलिस ने नायब तहसीलदार के खिलाफ भी काउंटर केस दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
दफ्तरों में ताला लटकने से आम जनता परेशान, जाति प्रमाण पत्र और सीमांकन के काम अटके
विधायकों और अफसरों की इस आपसी लड़ाई का सीधा खामियाजा अब छत्तीसगढ़ की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। प्रदेश के सभी 536 तहसील दफ्तरों में कामकाज पूरी तरह ठप होने के कारण दूर-दराज के गांवों से आने वाले लोग परेशान हो रहे हैं। जमीन का सीमांकन, नामांतरण, जाति और मूल निवास प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण और जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए आए ग्रामीणों को बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है। यदि यह गतिरोध जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले दिनों में आम नागरिकों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं क्योंकि राजस्व न्यायालयों की पेशी और अन्य कानूनी मामले भी इस हड़ताल की वजह से लटक गए हैं।



