
छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता कवासी लखमा के लिए आज का दिन बड़ी राहत लेकर आया है। सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद आज रायपुर सेंट्रल जेल से बाहर आए। जैसे ही जमानत के दस्तावेज जेल प्रशासन तक पहुंचें, उनकी रिहाई की औपचारिकताएं पूरी कर ली गई है। लखमा की रिहाई की खबर मिलते ही रायपुर जेल के बाहर सुबह से ही समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा शुरू हो गया।
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई चौंकाने वाली शर्तें
कवासी लखमा को जमानत तो मिल गई है, लेकिन अदालत ने इसके साथ ही कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं। सबसे बड़ी शर्त यह है कि अंतरिम जमानत की अवधि के दौरान लखमा को छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से बाहर रहना होगा। वे केवल कोर्ट में पेशी या सुनवाई के दौरान ही राज्य के भीतर आ सकेंगे। इस शर्त ने राजनीतिक हलकों में सबको हैरान कर दिया है क्योंकि लखमा बस्तर और प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं।
शराब घोटाले में फंसे थे पूर्व मंत्री
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चर्चित शराब घोटाला मामले में कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन पर भ्रष्टाचार और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के गंभीर आरोप लगाए गए थे। वे पिछले 379 दिनों से लगातार न्यायिक हिरासत में रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार शीर्ष अदालत ने उन्हें अंतरिम राहत दी है जिससे उनकी कानूनी टीम और परिवार ने चैन की सांस ली है।
कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल
लखमा की रिहाई को कांग्रेस पार्टी अपनी नैतिक जीत के रूप में देख रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्य परेशान जरूर हो सकता है लेकिन पराजित नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपनी एजेंसियों के जरिए विपक्षी नेताओं की आवाज दबाना चाहती थी लेकिन कोर्ट के इस फैसले से न्याय की जीत हुई है। रायपुर जेल के पास जुटे कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है और वे ढोल-नगाड़ों के साथ अपने नेता के स्वागत की तैयारी में हैं।
भूपेश बघेल ने इसे बताया सत्य की जीत
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी लखमा की जमानत का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि यह संघर्ष का समय था और सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला साबित करता है कि सत्य अंततः जीतता ही है। बघेल ने कहा कि पार्टी शुरू से ही कहती आ रही है कि यह मामले राजनीति से प्रेरित हैं। अब जब लखमा बाहर आ रहे हैं, तो पार्टी को आने वाले दिनों में और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अब आगे क्या होगा?
जमानत मिलने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि लखमा छत्तीसगढ़ से बाहर अपना ठिकाना कहां बनाएंगे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरिम जमानत के दौरान उन पर जांच में सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित न करने जैसी सामान्य शर्तें भी लागू होंगी। फिलहाल कांग्रेस के लिए यह एक बड़ी मनोवैज्ञानिक जीत है, क्योंकि लखमा जैसे जमीनी नेता की रिहाई से कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी बढ़ा है।



