बड़ी ख़बर: बिना इजाज़त नहीं लगेंगे गणेश पंडाल, High Court ने कहा- पुरानी गाइडलाइन रहेगी लागू जब तक नई नहीं आती

Chhattisgarh Ganesh Pandal Guidelines: त्योहारी सीजन में सड़कों पर अवैध तरीके से पंडाल, स्वागत द्वार और धार्मिक आयोजन करने वालों के लिए बुरी खबर है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि गणेश पूजा या किसी भी बड़े आयोजन के लिए जिला प्रशासन की अनुमति जरूरी है। बिना इजाज़त अगर सड़क पर पंडाल लगाया गया तो अब कार्रवाई तय है।

क्या है मामला?

Ganesh Pandals Permission Rule: यह पूरा मामला रायपुर निवासी नितिन सिंघवी की जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन सालों (2022, 2023, 2024) में रायपुर में गणेश और दुर्गा पूजा के दौरान किसी भी आयोजक ने प्रशासन से अनुमति नहीं ली, बावजूद इसके शहरभर में पंडाल लगा दिए गए।

सिंघवी का कहना है कि बिना अनुमति पंडाल लगाने से खासकर सकरी सड़कों पर ट्रैफिक जाम, असुविधा और अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है। पार्किंग नहीं होती, लोग परेशान होते हैं, लेकिन प्रशासन आंख मूंदे रहता है।

कोर्ट में क्या हुआ?

इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की खंडपीठ में सुनवाई हुई। राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि नई गाइडलाइंस बनाई जा रही है, लेकिन इसमें कुछ समय लगेगा क्योंकि कई विभागों से समन्वय जरूरी है।

कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि जब तक नई गाइडलाइंस लागू नहीं हो जातीं, तब तक 2022 में जारी पुरानी गाइडलाइन ही लागू रहेगी।

अभी कौन-सी गाइडलाइन लागू है?

छत्तीसगढ़ शासन के गृह (पुलिस) विभाग ने 22 अप्रैल 2022 को एक आदेश जारी किया था, जिसमें यह साफ-साफ कहा गया कि किसी भी संस्था, संगठन या व्यक्ति को धरना, जुलूस, धार्मिक आयोजन, रैली या पंडाल आदि लगाने से पहले जिला कलेक्टर से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

इसके लिए तय प्रारूप में आवेदन और घोषणापत्र देना होगा, ताकि आयोजन से पहले ट्रैफिक, बाजार व्यवस्था और सुरक्षा का सही प्लान बनाया जा सके।

नगर निगम और कलेक्टर कार्यालय ने भी मानी बात

याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने कलेक्टर कार्यालय और नगर निगम से RTI के तहत जानकारी ली थी। दोनों कार्यालयों ने साफ कहा कि 2022, 2023 और 2024 में गणेश और दुर्गा पूजा के किसी भी पंडाल के लिए कोई अनुमति जारी नहीं की गई।

यानी सैकड़ों आयोजन बिना इजाज़त के होते रहे और प्रशासन ने कोई सख्ती नहीं दिखाई।

अब क्या होगा?

हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि जब तक नई गाइडलाइन नहीं आ जाती, बिना अनुमति कोई पंडाल नहीं लगाया जा सकेगा। अगर कोई ऐसा करता है तो यह नियम उल्लंघन माना जाएगा और प्रशासन को कार्रवाई करनी होगी।

गणेश और दुर्गा उत्सव को लेकर अब मनमानी की छूट खत्म होने वाली है। आयोजकों को अब प्रशासन से लिखित अनुमति लेनी होगी, वरना कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। कोर्ट की सख्ती से उम्मीद है कि इस बार त्योहारों में अव्यवस्था नहीं, अनुशासन दिखेगा।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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