
CM Kanya Vivah Yojana Recovery Allegation Anganwadi: छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग में गरीब बेटियों के हाथ पीले करने वाली एक बड़ी कल्याणकारी योजना भ्रष्टाचार के घेरे में आ गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत मिलने वाली सरकारी सहायता राशि में से कथित तौर पर 5000 रुपये की अवैध वसूली किए जाने का एक सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। हैरान करने वाली बात यह है कि जरूरतमंद नवविवाहित जोड़ों को दी जाने वाली 35 हजार रुपये की आर्थिक मदद में से यह हिस्सा मांगा जा रहा है। इस पूरे खेल की पोल तब खुली जब राजधानी रायपुर की 28 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने ही विभाग के पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) के खिलाफ लिखित में मोर्चा खोल दिया।
खातों में पैसे आने के बाद वापस ली जा रही रकम, पूरे प्रदेश में चल रहा है वसूली का खेल
इस योजना में भ्रष्टाचार का यह नया तरीका बेहद चौंकाने वाला है। शिकायत के अनुसार, जैसे ही गरीब परिवारों की बेटियों के बैंक खातों में सरकार द्वारा स्वीकृत राशि हस्तांतरित की जाती है, वैसे ही उनसे कमीशन के रूप में 5000 रुपये वापस जमा कराने के लिए दबाव बनाया जाता है। कुछ मामलों में तो राशि जारी होने से पहले ही नकद भुगतान की शर्त रख दी जाती है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह गड़बड़ी केवल रायपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी गुपचुप तरीके से इस अवैध नेटवर्क को चलाया जा रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बयां किया दर्द, अधिकारियों से लेकर विधायक तक से की शिकायत
इस पूरे मामले को उजागर करने में रायपुर की 28 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को सौंपे अपने पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी पर्यवेक्षक द्वारा उन पर पीड़ित जोड़ों से पैसे वसूलने के लिए अनुचित दबाव डाला जा रहा था। कार्यकर्ताओं ने बताया कि बार-बार नवविवाहितों के घर जाकर इस तरह पैसों की मांग करने से वे खुद को बेहद अपमानित महसूस कर रही थीं और मानसिक रूप से परेशान हो चुकी थीं। अपनी इस पीड़ा को लेकर उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा स्थानीय विधायक अनुज शर्मा के पास भी लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
8 मई से ठंडे बस्ते में पड़ी थी शिकायत, आंदोलन की चेतावनी मिलने के बाद जागा प्रशासन
इस पूरे मामले में प्रशासनिक अमले की उदासीनता भी साफ नजर आ रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने यह लिखित शिकायत 8 मई को ही दर्ज करा दी थी। लेकिन इतने दिन बीत जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। विभाग की इस चुप्पी के कारण पीड़ित परिवारों और कार्यकर्ताओं में रोष बढ़ता गया। आखिरकार जब परेशान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ ने रायपुर जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) के कार्यालय के सामने उग्र धरने की चेतावनी दी, तब जाकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल शुरू हुई है।
कमीशनखोरी रोकने के लिए बदला था नियम, सामान की जगह सीधे खाते में भेजे जा रहे हैं पैसे
पूर्व में इस योजना के संचालन का तरीका अलग हुआ करता था, जिसमें सरकार द्वारा नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी बसाने के लिए सीधे सामान वितरित किया जाता था। उस समय भी बड़े पैमाने पर घटिया सामग्री बांटने और सामग्री की खरीद में भारी कमीशनखोरी की शिकायतें सामने आई थीं। इसी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने नियमों में बदलाव किया था और यह तय किया था कि अब बिचौलियों को हटाने के लिए सीधे दुल्हन के बैंक खाते में 35 हजार रुपये भेजे जाएंगे। हालांकि, इसके बावजूद भ्रष्ट तत्वों ने डिजिटल ट्रांसफर की इस नई व्यवस्था में भी सेंधमारी का रास्ता ढूंढ निकाला。
ऊपर तक पैसा जाने का दिया जा रहा था हवाला, विभाग की डायरेक्टर ने दिए जांच के आदेश
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अवैध वसूली के इस खेल को सही ठहराने के लिए पर्यवेक्षकों द्वारा यह दलील दी जा रही थी कि यह पैसा केवल निचले स्तर पर नहीं रहता, बल्कि ऊपर बैठे अधिकारियों तक पहुंचाया जाता है। हालांकि, इस गंभीर आरोप पर विभाग की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है。 मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की डायरेक्टर रेणुका श्रीवास्तव ने केवल इतना कहा है कि शिकायत को संज्ञान में ले लिया गया है और तथ्यों की निष्पक्ष जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया जा रहा है।
गरीब बेटियों के हक पर डाका, सवालिया निशान के घेरे में सरकारी पारदर्शिता का दावा
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का मुख्य उद्देश्य निर्धन और कमजोर वर्ग के परिवारों को उनकी बेटियों की शादी के समय होने वाले कर्ज और आर्थिक बोझ से राहत दिलाना है। लेकिन इस तरह की कल्याणकारी योजनाओं में होने वाले भ्रष्टाचार ने सीधे तौर पर प्रशासनिक पारदर्शिता के दावों की हवा निकाल दी है। अगर सरकारी सहायता का एक बड़ा हिस्सा इसी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता रहेगा, तो समाज के अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी कटौती के लाभ पहुंचाने का सपना कभी पूरा नहीं हो पाएगा। अब देखना होगा कि जांच कमेटी इन दोषियों पर क्या एक्शन लेती है।
आर-पार की लड़ाई के मूड में सहायिका संघ, कार्रवाई न होने पर उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ अब इस लड़ाई को बीच में छोड़ने के मूड में नहीं है। संघ के पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यह मुद्दा अब केवल एक साधारण विभागीय शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह गरीब जनता के अधिकारों से जुड़ा एक बड़ा नैतिक सवाल बन चुका है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद दोषी पर्यवेक्षक और इसमें शामिल अन्य कर्मचारियों को तुरंत सेवा से बर्खास्त नहीं किया गया, तो पूरे जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों का कामकाज ठप कर एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।



