
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के करीब चंपारण में आयोजित बीजेपी के प्रशिक्षण शिविर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अभनपुर विधायक इंद्र कुमार साहू ने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं को ‘गद्दार’ और ‘एजेंट’ करार दे दिया। कार्यकर्ताओं को अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में खुद विधायक के बिगड़े बोल ने आग में घी डालने का काम किया। विधायक की इस तीखी टिप्पणी के बाद पंडाल में मौजूद कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा और देखते ही देखते नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में हुई इस घटना ने संगठन के भीतर चल रही गुटबाजी को सरेआम कर दिया है।
विधायक का तीखा हमला: ‘गद्दारी करने वाले आज प्रवक्ता बनकर बैठे हैं’
ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के मुताबिक विधायक इंद्र कुमार साहू जब मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे तब उन्होंने जिला पंचायत चुनाव में मिली हार का जिक्र किया। उन्होंने सीधे तौर पर अपनी ही पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं पर भीतरघात का आरोप मढ़ दिया। विधायक ने तल्ख लहजे में कहा कि जो लोग विधानसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ एजेंट बनकर काम कर रहे थे और चुनाव हराने की साजिश रच रहे थे वे आज पार्टी में प्रवक्ता बनकर ऊंचे पदों पर बैठे हैं। इस बयान ने वहां मौजूद उन नेताओं को चुभ गया जिन पर विधायक का इशारा था।
वरिष्ठ नेताओं के सामने हंगामा: धक्का-मुक्की और हाथापाई से सन्न रह गए दिग्गज
विधायक के इस विवादित बयान के बाद चंपारण मंडल के भिलाई गांव में आयोजित कार्यक्रम का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। कार्यक्रम में मौजूद कई पदाधिकारियों ने इसे सांगठनिक अनुशासन का उल्लंघन बताते हुए तुरंत विरोध शुरू कर दिया। विवाद इतना बढ़ा कि मंच के सामने ही कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई और बात हाथापाई तक पहुंच गई। वहां मौजूद सीनियर नेताओं ने जैसे-तैसे बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला लेकिन तब तक अनुशासन के नाम पर हो रहे इस शिविर की साख पर बट्टा लग चुका था।
भीतरघात का पुराना दर्द: जिला पंचायत चुनाव की हार बनी विवाद की जड़
दरअसल रायपुर जिले में बीजेपी के अंदर लंबे समय से खींचतान चल रही है। जिला पंचायत चुनाव में मिली हार को लेकर पार्टी के भीतर दो गुट आमने-सामने हैं। विधायक इंद्र कुमार साहू उन चेहरों से नाराज थे जिन्हें वे अपनी हार या कमजोरी का जिम्मेदार मानते हैं। लेकिन एक बंद कमरे की बैठक के बजाय सार्वजनिक मंच से अपनी ही पार्टी के लोगों को ‘गद्दार’ कहना अब खुद विधायक के लिए गले की हड्डी बन गया है। इस बयान ने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी बुरा असर डाला है।
संगठन की साख पर सवाल: क्या विधायक पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई?
इस घटना के बाद रायपुर बीजेपी की अंदरूनी कलह पूरी तरह उजागर हो गई है। संगठन के बड़े नेताओं ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी की अनुशासन समिति विधायक से उनके इस व्यवहार पर स्पष्टीकरण मांग सकती है। बीजेपी हमेशा से खुद को एक कैडर-बेस्ड और अनुशासित पार्टी होने का दावा करती रही है लेकिन इस तरह सरेआम हुई हाथापाई ने विरोधियों को हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है।
कांग्रेस को मिला मुद्दा: बीजेपी की अंतर्कलह पर तंज कसने का मौका
बीजेपी के घर में मचे इस गदर ने विपक्षी दल कांग्रेस को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा थमा दिया है। कांग्रेस नेताओं ने तंज कसते हुए कहा है कि जो पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को अनुशासन नहीं सिखा सकती वह प्रदेश को क्या संभालेगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर इस विवाद को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी को इसका बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है।
कार्यकर्ताओं में भारी रोष: आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है असर
विधायक के ‘एजेंट’ और ‘गद्दार’ वाले शब्दों से केवल नेता ही नहीं बल्कि जमीनी स्तर के कार्यकर्ता भी आहत महसूस कर रहे हैं। चंपारण के इस ट्रेनिंग कैंप में हुई घटना के बाद कई स्थानीय कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अगर नेतृत्व स्तर पर ही एक-दूसरे को नीचा दिखाने का खेल चलेगा तो चुनावी मैदान में एकजुट होकर लड़ना मुश्किल होगा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी आलाकमान इस गुटबाजी को थामने के लिए क्या कदम उठाता है।
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