Ganesh Utsav 2025: धमतरी में 1964 से सज रही गणेश झांकी, इस बार खाटू श्याम दरबार की थीम

धमतरी Ganesh Utsav 2025: शहर के आमापारा वार्ड में एक ऐसा गणेश पंडाल हर साल सजता है जो भक्ति, समर्पण और सामूहिक मेहनत की मिसाल बन चुका है। यहां 1962 से लगातार गणेश प्रतिमा की स्थापना की जा रही है और 1964 से झांकी सजाने की परंपरा शुरू हुई थी। बालकला मंदिर गणेश उत्सव समिति द्वारा आयोजित यह उत्सव आज भी पूरी तरह से श्रमदान पर आधारित होता है, जिसमें न मजदूरी दी जाती है और न ही कोई पेशेवर सेवा ली जाती है।

बिना मजदूरी, पूरी सेवा भावना से सजता है पंडाल

इस समिति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि गणेशोत्सव के हर काम चाहे वह टेंट लगाना हो, सजावट करना हो या झांकी तैयार करना सब कुछ समिति के ही 40 सदस्य करते हैं। इसके चलते हर साल ढाई से तीन लाख रुपये की बचत होती है। समिति सिर्फ जरूरी सामान की ही खरीदारी करती है, बाकी काम सदस्य आपस में बांट लेते हैं।

हर साल नई झांकी, इस बार खाटू श्याम बाबा का दरबार

हर साल समिति एक नई थीम पर झांकी सजाती है। बीते वर्षों में अयोध्या धाम, सीता स्वयंवर, द्रौपदी चीरहरण, कृष्ण-सुदामा मिलन, शेषनाग शैय्या, काल यवन वध, केदारनाथ, बद्रीनाथ, अमरनाथ जैसी झांकियां बनाई जा चुकी हैं। इस बार खाटू श्याम बाबा के दरबार की झांकी सजाई जा रही है।

झांकी की योजना एक साल पहले ही बना ली जाती है और निर्माण कार्य गणेश उत्सव से कुछ महीने पहले शुरू हो जाता है।

File Photo

1962 में रखी गई थी नींव, अब नई पीढ़ी संभाल रही जिम्मेदारी

समिति की शुरुआत 1962 में खमन मीनपाल, विष्णु पटेल, राजकुमार बैरागी, किशन पटेल, सूरज पाल, किशन यादव और रविंद्र पटेल ने की थी। अब उनके बेटे-पोते इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। पहले स्व. शारदा कोसरिया, रामआसरा और होरीलाल धीवर सेवा में लगे रहते थे, अब उनके परिजन जैसे मुकेश कोसरिया, देवेंद्र (पिंकी) यादव, गुड्डू धीवर यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

स्थानीय कला, मेहनत और लगन का मिला पुरस्कारों में सम्मान

बालकला मंदिर गणेश उत्सव समिति को अब तक 35 बार स्थल सजावट में और 20 बार झांकी सजावट में प्रथम पुरस्कार मिल चुका है। पहले झांकी के लिए बोरी, कपड़ा, पुट्ठा आदि का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब आधुनिक डेकोरेशन सामग्री भी शामिल की जा रही है। प्रतिमा और झांकी की मूर्तियां रूपेश यादव और गोलू यादव तैयार करते हैं, जो वर्षों से इस सेवा में लगे हुए हैं।

समाज को जोड़ने की भावना से होता आयोजन

समिति का मुख्य उद्देश्य सिर्फ धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि लोगों के बीच सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा देना है। वार्ड चंदा और स्वैच्छिक सहयोग से आयोजन होता है और पूरे 11 दिन समिति के सदस्य अपनी निजी जिम्मेदारियों से समय निकालकर सेवा में जुटे रहते हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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