छत्तीसगढ़ में लापता महिलाओं का खौफनाक आंकड़ा: 3 साल में 7188 का सुराग नहीं, चौंकाने वाली रिपोर्ट, पुलिस भी नहीं ढूंढ पा रही

छत्तीसगढ़ के गृह विभाग से जारी ताजा आंकड़ों ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले तीन वर्षों के भीतर राज्य से हजारों महिलाएं और लड़कियां लापता हुई हैं, जिनमें से 7188 का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। पुलिस की फाइलों में ये मामले ‘गुमशुदगी’ के तौर पर दर्ज हैं, लेकिन हकीकत यह है कि न तो उन्हें जमीन निगल गई और न ही आसमान, फिर भी वे सिस्टम की पहुंच से बाहर हैं। आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में महिलाओं के गायब होने का ट्रेंड सबसे अधिक डराने वाला है।

राजधानी रायपुर में स्थिति गंभीर: हर दिन एक लड़की हो रही गायब

रायपुर में महिलाओं और लड़कियों के लापता होने का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में अकेले रायपुर से 1243 लड़कियां और 5481 महिलाएं गायब हुई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि साल 2026 की शुरुआत यानी सिर्फ जनवरी महीने में ही 49 लड़कियां लापता हो चुकी थीं, जिनमें से पुलिस केवल 22 को ही ढूंढ पाई। पुलिस जांच में अधिकतर मामलों के पीछे ‘बहला-फुसलाकर ले जाने’ की बात सामने आ रही है।

बिलासपुर और दुर्ग का हाल: लापता महिलाओं की संख्या में भारी उछाल

बिलासपुर जिले में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां 2023 से अब तक कुल 4294 महिलाएं और लड़कियां गायब हुई हैं। हालांकि पुलिस ने इनमें से 3387 को तलाश लिया है, लेकिन 1086 लड़कियां और 3208 महिलाओं के लापता होने की कुल संख्या प्रशासन की नींद उड़ाने के लिए काफी है। वहीं औद्योगिक शहर दुर्ग में भी 2565 महिलाओं और 752 लड़कियों की गुमशुदगी दर्ज की गई है।

चार प्रमुख जिलों का तुलनात्मक विवरण: 2023 से जनवरी 2026 तक

छत्तीसगढ़ के चार सबसे प्रभावित जिलों में लापता महिलाओं और लड़कियों का आधिकारिक आंकड़ा इस प्रकार है:

जिलालापता महिलाएं (संख्या)लापता लड़कियां (संख्या)
रायपुर54811243
बिलासपुर32081086
दुर्ग2565752
बलौदाबाजार1922699

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: गुमशुदगी या अपहरण?

आमतौर पर जब भी कोई लड़की या महिला गायब होती है, तो पुलिस उसे केवल ‘गुमशुदगी’ के तौर पर दर्ज करती है। अपहरण की धाराएं तब जोड़ी जाती हैं जब जांच के दौरान किसी के द्वारा जबरन ले जाने की पुष्टि होती है। जानकारों का मानना है कि इस प्रक्रिया में देरी होने के कारण अपराधियों को भागने या पीड़ित को राज्य से बाहर ले जाने का पर्याप्त समय मिल जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, पूरे प्रदेश में पिछले तीन सालों में पुलिस ने 40,231 लोगों को खोजा जरूर है, लेकिन 7188 का न मिलना एक बड़ी विफलता है।

साल दर साल बढ़ती दहशत: राजधानी में महिलाओं की गुमशुदगी का ट्रेंड

रायपुर शहर में महिलाओं के गायब होने के आंकड़े साल-दर-साल बढ़ते ही जा रहे हैं। 2023 में जहां 1590 महिलाएं गायब हुई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या 1726 और 2025 में 1982 तक पहुंच गई। साल 2026 के केवल पहले 31 दिनों में ही 183 महिलाओं के लापता होने की रिपोर्ट थानों तक पहुंची है। हालांकि पुलिस का दावा है कि वह पूरी सक्रियता से तलाश कर रही है, लेकिन रिकवरी की दर गायब होने की दर के मुकाबले काफी कम है।

सुरक्षा उपायों की जरूरत: आखिर कहां जा रही हैं ये महिलाएं?

इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का लापता होना मानव तस्करी (Human Trafficking) या किसी बड़े संगठित अपराध की ओर इशारा करता है। लापता होने वाली महिलाओं में से कई का परिवार अब भी थानों के चक्कर काट रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ गुमशुदगी दर्ज कर लेना काफी नहीं है, बल्कि यह पता लगाना जरूरी है कि वे किस मजबूरी में घर छोड़ रही हैं या उन्हें कौन शिकार बना रहा है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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