
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। बिंद्रानवागढ़ से कांग्रेस विधायक और आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जनक ध्रुव एक मासूम बच्चे के हाथ में घातक बंदूक थमाते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह फोटो तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें विधायक अपने समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच खड़े हैं। एक तरफ जहां सरकार बस्तर और अन्य इलाकों में नक्सलियों से हथियार डलवाकर उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि का बच्चे को हथियार सौंपना गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल की उड़ी धज्जियां: गार्ड की बंदूक से ‘खेल’ रहे थे विधायक
वायरल तस्वीर में दिख रहा हथियार विधायक के सुरक्षाकर्मी का बताया जा रहा है। तस्वीर में साफ दिख रहा है कि विधायक ध्रुव बच्चे को राइफल पकड़ा रहे हैं, जबकि बगल में वर्दीधारी गार्ड खड़ा है। जानकार इसे सुरक्षा नियमों का खुला उल्लंघन मान रहे हैं। कानून के मुताबिक, सर्विस वेपन (सरकारी हथियार) को किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति, खासकर बच्चे के हाथ में देना न केवल लापरवाही है, बल्कि एक बड़ी दुर्घटना को न्योता देना भी है। सोशल मीडिया पर लोग इस बात को लेकर आक्रोश जता रहे हैं कि जिस उम्र में बच्चे के हाथ में कलम और किताब होनी चाहिए, वहां विधायक उसे बंदूक थमाकर क्या संदेश देना चाहते हैं।
बीजेपी ने बोला हमला: आत्मसमर्पण के दौर में ऐसी तस्वीर अशोभनीय
इस मुद्दे को लेकर भाजपा ने कांग्रेस और विधायक जनक ध्रुव की घेराबंदी शुरू कर दी है। भाजपा जिला अध्यक्ष अनिल चंद्राकर ने इस कृत्य को समाज के लिए घातक बताया है। उन्होंने कहा कि एक ओर सुरक्षा बल के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर नक्सलियों का खात्मा कर रहे हैं और भटके हुए लोग हथियार छोड़कर समाज में लौट रहे हैं, वहीं कांग्रेस के प्रदेश स्तर के नेता बच्चों को हथियारों की ओर प्रेरित कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि एक सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति को अपनी मर्यादा और संवैधानिक जिम्मेदारी का ख्याल रखना चाहिए था।
आर्म्स एक्ट का उल्लंघन: कानून की नजर में अपराध है यह लापरवाही
कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो यह मामला केवल नैतिकता तक सीमित नहीं है। आर्म्स एक्ट 1959 के तहत बिना वैध लाइसेंस के किसी भी व्यक्ति को हथियार सौंपना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के तहत बच्चों को किसी भी प्रकार के जोखिम भरी या खतरनाक स्थिति में डालना कानूनन गलत है। एक नाबालिग के हाथ में लोडेड हथियार देना लापरवाही की पराकाष्ठा मानी जा सकती है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह तस्वीर किस कार्यक्रम की है, लेकिन कानून के जानकारों का कहना है कि इस पर कड़ी कार्रवाई की गुंजाइश बनती है।
विवादों में घिरे विधायक: अब तक नहीं आया कोई स्पष्टीकरण
जनक ध्रुव छत्तीसगढ़ कांग्रेस में एक बड़ा आदिवासी चेहरा हैं और उन पर संगठन की भी बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में उनकी इस तस्वीर ने पार्टी की छवि को भी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, अभी तक विधायक या कांग्रेस की ओर से इस वायरल फोटो पर कोई आधिकारिक बयान या सफाई नहीं आई है। गरियाबंद जिले के स्थानीय लोग और विपक्षी नेता अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी सुरक्षाकर्मी व विधायक के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएं। त्योहारों और शांति के माहौल के बीच आई इस तस्वीर ने पूरे प्रदेश में बहस छेड़ दी है।



