
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का अभियान अब अपने सबसे कठिन दौर में पहुंच गया है। सरकार ने इस साल 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन 31 जनवरी की अंतिम तारीख बेहद करीब होने के बावजूद अब तक केवल 116 लाख टन की ही खरीदी हो पाई है। बीच में 24, 25 और 26 जनवरी को सरकारी अवकाश होने के कारण अब प्रशासन के पास केवल 6 कामकाजी दिन बचे हैं। इन 6 दिनों में सरकार को लक्ष्य पूरा करने के लिए 44 लाख टन धान खरीदना होगा, जो एक बड़ी चुनौती नजर आ रही है।
5.5 लाख किसान अब भी अपनी बारी के इंतजार में
राज्य के पंजीकृत किसानों के आंकड़े डराने वाले हैं। प्रदेश में कुल 27.43 लाख किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया था, लेकिन अब तक केवल 21.31 लाख किसान ही केंद्रों तक पहुंच पाए हैं। इसका सीधा मतलब है कि लगभग साढ़े पांच लाख किसान अब भी टोकन और अपनी बारी के इंतजार में बैठे हैं। इनमें से करीब 3 लाख किसानों का तो अभी तक ऑनलाइन टोकन भी नहीं कट पाया है। समय कम होने के कारण किसानों में इस बात को लेकर डर है कि क्या वे अंतिम तारीख तक अपनी उपज बेच पाएंगे या नहीं।
1358 केंद्रों पर पैर रखने की जगह नहीं, भंडारण का संकट
धान खरीदी की रफ्तार धीमी होने की एक बड़ी वजह उठाव का न होना है। प्रदेश के कुल 2740 केंद्रों में से 1358 केंद्र ऐसे हैं जहां धान का स्टॉक बफर लिमिट से काफी ऊपर चला गया है। केंद्रों में नया धान रखने के लिए जगह नहीं बची है, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। बस्तर और मोहला-मानपुर जैसे इलाकों में तो हालात इतने खराब हैं कि वहां के लगभग सभी केंद्रों में बफर स्टॉक की सीमा पार हो चुकी है। जब तक मिलर्स धान का उठाव नहीं करेंगे, तब तक नए धान की आवक संभालना मुश्किल होगा।
बस्तर से लेकर राजनांदगांव तक बफर स्टॉक का दबाव
जिलों की स्थिति देखें तो आदिवासी बहुल इलाकों में संकट ज्यादा गहरा है। बस्तर के सभी 79 और दंतेवाड़ा के सभी 15 केंद्रों में धान क्षमता से अधिक भरा हुआ है। यही हाल कांकेर, कोंडागांव और बालोद जैसे जिलों का भी है। राजनांदगांव के 96 में से 86 केंद्रों में धान जाम पड़ा है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि इन केंद्रों से धान को जल्द से जल्द गोदामों तक कैसे पहुँचाया जाए ताकि बचे हुए किसानों का धान खरीदा जा सके।
27 हजार करोड़ का भुगतान, पर तकनीकी अड़चनें बरकरार
सरकार ने अब तक खरीदे गए धान के एवज में किसानों को 27,414 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। पीएफएमएस (PFMS) पोर्टल के जरिए 24.86 लाख भुगतान सफल रहे हैं। हालांकि, करीब 47 हजार मामले ऐसे हैं जो तकनीकी कारणों या दस्तावेजों की कमी की वजह से अटके हुए हैं। भुगतान की प्रक्रिया तो चल रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर टोकन कटने और धान तौलाई की धीमी गति ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
धान खरीदी के मुख्य आंकड़े एक नजर में
इस साल की खरीदी प्रक्रिया को समझने के लिए नीचे दी गई तालिका के माध्यम से मुख्य आंकड़ों पर गौर करें:
| विवरण | आंकड़े |
| कुल पंजीकृत किसान | 27,43,135 |
| धान बेचने वाले किसान | 21,31,843 |
| अब तक हुई कुल खरीदी | 116 लाख टन |
| खरीदी का अंतिम लक्ष्य | 160 लाख टन |
| कुल भुगतान राशि | 27,414 करोड़ |
| कुल खरीदी केंद्र | 2740 |
क्या बढ़ेगी खरीदी की तारीख?
धान खरीदी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए राज्यभर में यह चर्चा तेज है कि क्या सरकार 31 जनवरी के बाद तारीख बढ़ाएगी। किसानों और कई संगठनों ने मांग की है कि छुट्टियों और भंडारण की समस्या को देखते हुए कम से कम एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया जाए। फिलहाल, मुख्यमंत्री और विभागीय अधिकारियों की नजर प्रतिदिन हो रही खरीदी के आंकड़ों पर है। अगर अगले 6 दिनों में उठाव की प्रक्रिया तेज नहीं हुई, तो लक्ष्य हासिल करना नामुमकिन होगा।



