
CG Gas Cylinder Scam: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गैस उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रायपुरा चौक स्थित इंद्रप्रस्थ फेस-2 के निवासी धर्मेंद्र ने जब घर में नया सिलेंडर लगाया, तो वह महज दो दिन में ही बंद हो गया। शक होने पर जब उन्होंने सिलेंडर को हिलाकर देखा, तो भीतर से पानी की आवाज आई। उपभोक्ता ने जब सिलेंडर के नोजल में पिन डालकर चेक किया, तो भारी मात्रा में पानी बाहर निकलने लगा। इस घटना ने गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
टाटीबंध की गैस एजेंसी पर धोखाधड़ी का आरोप
पीड़ित उपभोक्ता के अनुसार, उन्होंने करीब दो महीने पहले टाटीबंध स्थित ‘परवेज गैस एजेंसी’ से सिलेंडर बुक किया था। डिलीवरी के वक्त सिलेंडर का वजन तौलकर नहीं दिखाया गया था, लेकिन भारी महसूस होने पर उपभोक्ता ने उसे रख लिया। जब पुराना सिलेंडर खत्म हुआ और इस नए सिलेंडर का इस्तेमाल शुरू किया गया, तो दो दिन के भीतर ही गैस खत्म हो गई। उपभोक्ता का आरोप है कि एजेंसी जानबूझकर वजन बढ़ाने के लिए सिलेंडर में पानी भर रही है ताकि आम जनता की जेब पर डाका डाला जा सके।

गैस एजेंसी संचालक का गैर-जिम्मेदाराना जवाब
जब इस मामले को लेकर परवेज गैस एजेंसी के संचालक से संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। संचालक ने पहले तो तर्क दिया कि गैस लिक्विड फॉर्म में होती है जो पानी जैसी दिखती है, लेकिन बाद में अपनी बात पलटते हुए कहा कि कंपनी में सिलेंडर धुलते समय उनमें पानी भर गया होगा। संचालक ने इसे एक सामान्य घटना बताते हुए कहा कि हर दो-तीन महीने में ऐसे एक-दो मामले सामने आते रहते हैं। उन्होंने उपभोक्ता को सिलेंडर वापस लाने और वजन के हिसाब से पैसे लौटाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
रायपुर में पहले भी आ चुके हैं ऐसे मामले
खाद्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, राजधानी में गैस सिलेंडर में पानी मिलने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भनपुरी इलाके में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था। उस वक्त विभाग ने गैस कंपनी और एजेंसी के बीच पत्राचार कर कड़ी कार्रवाई की थी। जानकारों का कहना है कि गैस माफिया सिलेंडर से दो-तीन किलो गैस निकाल लेते हैं और उसकी भरपाई के लिए उसमें पानी डाल देते हैं। वजन बराबर होने के कारण आम उपभोक्ता को शुरुआत में इस चोरी का पता नहीं चल पाता।
कबाड़ हो चुके सिलेंडरों से हादसे का डर
धोखाधड़ी के साथ-साथ सुरक्षा को लेकर भी बड़ी लापरवाही देखने को मिल रही है। कई गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं को बेहद पुराने और जर्जर सिलेंडर सप्लाई कर रही हैं। इन सिलेंडरों में लीकेज का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा डिलीवरी के दौरान कर्मचारी सिलेंडरों को गाड़ियों से सीधे सड़क पर पटक देते हैं, जिससे वे डैमेज हो जाते हैं। बिना वजन किए सिलेंडर बांटने की आदत ने गैस माफियाओं के हौसले बुलंद कर दिए हैं, जिससे किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
खाद्य विभाग ने दिए जांच के आदेश
सिलेंडर में पानी मिलने की शिकायत अब जिला खाद्य नियंत्रक तक पहुंच गई है। रायपुर के खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी कुछ एजेंसियों के खिलाफ ऐसी शिकायतें मिली थीं जिन पर कार्रवाई की गई है। इस मामले में भी दोषी पाए जाने पर गैस एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे सिलेंडर लेते समय उसे तौलने के लिए डिलीवरी मैन पर दबाव जरूर बनाएं।



