
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है। सरकार द्वारा तय की गई समय सीमा के अनुसार 31 जनवरी 2026 धान बेचने का आखिरी दिन होगा। इसके बाद समितियों में खरीदी बंद कर दी जाएगी। वर्तमान में किसानों के पास अपनी फसल बेचने के लिए अब केवल 16 दिनों का समय बचा है। राज्य के ग्रामीण इलाकों में किसान अभी भी टोकन की सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं ताकि बचा हुआ धान समय पर बेचा जा सके। इसी बीच प्रशासन ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसे जानना हर किसान के लिए बहुत जरूरी है।
30 और 31 जनवरी के टोकन में हुआ बड़ा बदलाव
कांकेर जिला प्रशासन ने धान खरीदी को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन के मुताबिक 30 और 31 जनवरी को शनिवार और रविवार होने के कारण इन दो दिनों में धान की खरीदी नहीं की जाएगी। जिन किसानों को इन तारीखों के टोकन पहले ही जारी किए जा चुके थे, उनके टोकन अब शासन स्तर पर संशोधित कर दिए गए हैं। अब उन सभी किसानों को 29 जनवरी को ही अपना धान लेकर केंद्रों पर पहुंचना होगा। जिला खाद्य अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिए 29 जनवरी की तय तारीख को ही अपना धान बेचना सुनिश्चित करें।
खरीदी का लक्ष्य और अब तक के आंकड़े
प्रदेश में इस साल धान खरीदी के लिए 165 लाख मीट्रिक टन का विशाल लक्ष्य रखा गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक 95 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी पूरी हो चुकी है। हालांकि अभी भी लाखों किसान ऐसे हैं जिनका धान बिकना बाकी है। लक्ष्य और बचे हुए किसानों की संख्या को देखते हुए गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या सरकार धान खरीदी की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाएगी। फिलहाल प्रशासन पूरी तेजी के साथ धान के उठाव और तौल की प्रक्रिया को पूरा करने में जुटा हुआ है।
धमतरी के किसान साहिल ने पेश की मिसाल
धान खरीदी की इस गहमागहमी के बीच धमतरी जिले के किसान साहिल साहू की सफलता की कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्राम परखंदा के रहने वाले साहिल ने आधुनिक तकनीक और सही योजना के दम पर खेती को मुनाफे का सौदा बना दिया है। उन्होंने इस सीजन में अपने 11 एकड़ खेत से कुल 231 क्विंटल धान का उत्पादन किया और इसे गाड़ाडीह उपार्जन केंद्र में सफलतापूर्वक बेचा। साहिल की यह कामयाबी बताती है कि यदि सरकारी योजनाओं और कृषि विभाग के मार्गदर्शन का सही उपयोग किया जाए तो खेती से बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।
पारदर्शी व्यवस्था से किसानों का बढ़ा भरोसा
किसान साहिल साहू का मानना है कि इस साल की खरीदी व्यवस्था पिछली बार की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित रही है। उपार्जन केंद्रों पर तौल के लिए समय तय होना और लंबी लाइनों से छुटकारा मिलना किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हुआ है। सहयोगी कर्मचारियों के व्यवहार और त्वरित भुगतान की प्रक्रिया ने व्यवस्था के प्रति किसानों के विश्वास को और मजबूत किया है। उन्नत बीजों का चयन और संतुलित खाद के उपयोग से न केवल पैदावार बढ़ी है बल्कि फसल की गुणवत्ता भी बाजार के मानकों के अनुरूप बेहतर हुई है।
आर्थिक स्थिरता से आत्मनिर्भर हो रहे अन्नदाता
धान की बिक्री से होने वाली आय किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। किसान अब इस पैसे का उपयोग अपने पुराने कर्ज चुकाने, परिवार की जरूरतों को पूरा करने और अगले सीजन की तैयारी में कर रहे हैं। साहिल जैसे प्रगतिशील किसानों का कहना है कि समय पर भुगतान और उचित मूल्य मिलने से किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। यह स्थिरता उन्हें भविष्य के लिए सुरक्षित महसूस कराती है और खेती को नई ऊर्जा के साथ जारी रखने के लिए प्रेरित करती है।



