बस्तर के जंगलों में जबरदस्त मुठभेड़: टॉप नक्सली लीडर पापाराव की घेराबंदी, बीजापुर में कोबरा और DRG का बड़ा एक्शन

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सोमवार सुबह सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ शुरू हो गई। घने जंगलों के बीच दोनों ओर से रुक-रुक कर भारी गोलीबारी हो रही है। जानकारी के अनुसार, जवानों को इलाके में बड़े नक्सली नेताओं की मौजूदगी का इनपुट मिला था, जिसके बाद यह ऑपरेशन लॉन्च किया गया। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया है और जंगलों के भीतर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। मुठभेड़ वाली जगह पर अतिरिक्त बल रवाना कर दिया गया है ताकि नक्सलियों के भागने के सभी रास्ते बंद किए जा सकें।

नक्सली कमांडर पापाराव के फंसे होने की खबर

इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में टॉप नक्सली लीडर पापाराव का नाम सामने आ रहा है। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, पापाराव अपने दल के साथ इसी इलाके में डेरा डाले हुए था। पापाराव छत्तीसगढ़ और तेलंगाना सीमा पर सक्रिय सबसे खूंखार माओवादी चेहरों में से एक माना जाता है। पुलिस को उम्मीद है कि अगर घेराबंदी सफल रही तो माओवादी संगठन को अब तक का सबसे बड़ा झटका लग सकता है। फिलहाल मौके पर मौजूद जवान बेहद सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि नक्सलियों ने घने जंगलों और पहाड़ों का सहारा लेकर मोर्चा संभाल रखा है।

कोबरा और डीआरजी का संयुक्त ऑपरेशन

इस बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन में जिला रिजर्व गार्ड (DRG), स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के जवान शामिल हैं। तीनों ही बल जंगल युद्ध में माहिर माने जाते हैं। जवानों ने रणनीति के तहत नक्सलियों के सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाया है। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान पूरी तरह से खुफिया जानकारी पर आधारित है। सुरक्षाबलों की कोशिश है कि कम से कम नुकसान में नक्सलियों के कैम्प को ध्वस्त किया जाए। इलाके में फिलहाल संचार व्यवस्था ठप है और पल-पल की जानकारी मुख्यालय को भेजी जा रही है।

बौखलाहट के बीच 20 नक्सलियों ने डाला हथियार

सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और सरकार की नई पुनर्वास नीति का असर अब धरातल पर दिखने लगा है। मुठभेड़ के बीच ही एक और बड़ी खबर सामने आई है कि बीजापुर में 20 से अधिक सक्रिय नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन नक्सलियों ने कल शाम पुलिस ऑफिसर्स मेस के कॉन्फ्रेंस हॉल में एसपी और सीआरपीएफ के बड़े अफसरों के सामने अपने हथियार डाल दिए। सरेंडर करने वाले इन माओवादियों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से जंगलों में रहकर भटक रहे थे और अब समाज की मुख्यधारा में लौटकर शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं।

आत्मसमर्पण करने वालों को मिलेगा सरकारी लाभ

समर्पण करने वाले नक्सलियों में कई ऐसे चेहरे शामिल हैं जो पूर्व में गंभीर वारदातों का हिस्सा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इन सभी को राज्य सरकार की ‘पुनर्वास एवं आत्मसमर्पण नीति’ के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, उन्हें रहने के लिए आवास, बच्चों की शिक्षा और रोजगार के साधन भी मुहैया कराए जाएंगे। सरकार की इस नीति का उद्देश्य नक्सलियों के भीतर के डर को खत्म करना और उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि बंदूक छोड़कर वे सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं। इस सामूहिक सरेंडर को नक्सली संगठन की टूटती कमर के रूप में देखा जा रहा है।

इलाके में भारी फोर्स की तैनाती और निगरानी

बीजापुर और आसपास के जिलों में वर्तमान में हाई अलर्ट की स्थिति है। सरेंडर कार्यक्रम और जारी मुठभेड़ को देखते हुए पुलिस ऑफिसर्स मेस और संवेदनशील ठिकानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर जवानों की तैनाती की गई है और ड्रोन कैमरों के जरिए जंगलों की निगरानी की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कई और नक्सली मुख्यधारा में शामिल हो सकते हैं। सुरक्षाबलों की इस दोहरी रणनीति ने नक्सलियों के मनोबल को पूरी तरह से गिरा दिया है, जिससे क्षेत्र में विकास और शांति की नई उम्मीद जगी है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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