Electric Vehicle: छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की धूम: तेल संकट के बीच EV का बढ़ा क्रेज, डेढ़ महीने में बिके 3000 से ज्यादा वाहन

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की सप्लाई में आ रही बाधाओं का असर अब छत्तीसगढ़ की सड़कों पर दिखने लगा है। ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मूज’ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर पाबंदियां लगाने से पूरी दुनिया में ईंधन की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत को कुछ रियायतें मिलने के बावजूद बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल की आशंका बनी हुई है। इसी डर और भविष्य की बचत को देखते हुए छत्तीसगढ़ के लोग अब तेजी से इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की ओर रुख कर रहे हैं।

रिकॉर्ड तोड़ बिक्री: मात्र 45 दिनों में बिक गए 3000 से ज्यादा वाहन

पिछले डेढ़ महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। इस दौरान राज्य भर में 3000 से ज्यादा ईवी बिक चुके हैं, जो सामान्य दिनों की तुलना में लगभग दोगुना है। अगर हम श्रेणी वार देखें तो सबसे ज्यादा क्रेज दोपहिया वाहनों का है जिनकी संख्या 1700 के करीब है। इसके अलावा 700 तीन पहिया वाहन और 500 से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें भी खरीदी गई हैं। आमतौर पर यह आंकड़ा 1700 से 1800 के आसपास रहता था।

निजी कंपनियों ने बढ़ाए दाम: पेट्रोल-डीजल की महंगाई से बढ़ी घबराहट

ईवी की ओर लोगों के झुकाव की एक बड़ी वजह कुछ निजी पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा ईंधन के दाम में की गई भारी बढ़ोतरी है। नायरा और शेल इंडिया जैसी कंपनियों ने डीजल-पेट्रोल की कीमतों में करीब 25 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया है। इस अचानक आई तेजी ने आम आदमी के बजट को हिलाकर रख दिया है। लोगों को लग रहा है कि आने वाले समय में सरकारी तेल कंपनियां भी दाम बढ़ा सकती हैं, इसलिए लोग किफायती विकल्प के तौर पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।


ई-रिक्शा का बढ़ा दबदबा: माल ढुलाई और सवारी के लिए पहली पसंद

सिर्फ निजी गाड़ियां ही नहीं बल्कि व्यवसायिक क्षेत्र में भी इलेक्ट्रिक क्रांति दिख रही है। शहरों में ई-रिक्शा की बिक्री में भारी तेजी आई है क्योंकि यह डीजल ऑटो के मुकाबले काफी सस्ता पड़ता है। साल 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन 50 हजार के पार पहुंच चुका है। कम मेंटेनेंस और जीरो फ्यूल कॉस्ट की वजह से छोटे व्यापारी और ऑटो चालक अब पूरी तरह से बैटरी चालित वाहनों पर भरोसा जता रहे हैं।

सरकार का बड़ा प्रोत्साहन: नई गाड़ी खरीदने पर मिल रही 1 लाख तक की सब्सिडी

छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश को प्रदूषण मुक्त बनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए लुभावनी सब्सिडी दे रही है। राज्य सरकार की योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर 1 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जा रही है। हालांकि प्रशासन ने एक सीमा भी तय की है। नियम के मुताबिक 20 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली लग्जरी गाड़ियों की खरीद पर अब सब्सिडी नहीं दी जाएगी। सरकार का पूरा ध्यान मध्यमवर्गीय परिवारों और कमर्शियल उपयोग वाले वाहनों को राहत देने पर है।

भविष्य का डिजिटल कवच: बुनियादी ढांचे के विस्तार पर जोर

जैसे-जैसे ईवी की मांग बढ़ रही है वैसे-वैसे चार्जिंग स्टेशनों का जाल भी बिछाया जा रहा है। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे बड़े शहरों में चार्जिंग पॉइंट की संख्या बढ़ाई जा रही है ताकि लंबी दूरी तय करने वाले चालकों को परेशानी न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का संकट इसी तरह बना रहा तो साल के अंत तक छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या मौजूदा अनुमानों को भी पार कर जाएगी। अब लोग इसे केवल मजबूरी नहीं बल्कि एक समझदार निवेश के तौर पर देख रहे हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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