
Gig Workers Strike: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी के खिलाफ अब ऑनलाइन डिलीवरी और रैपिड ट्रांसपोर्ट सेक्टर के कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। ऐप आधारित सेवाओं से जुड़े लाखों गिग वर्कर्स में कंपनियों और सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है। गिग और प्लेटफॉर्म सेवा श्रमिक संघ (GIPSWU) ने अपनी आर्थिक समस्याओं को लेकर एक बड़े देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। यूनियन ने मांग रखी है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए ऐप आधारित डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट पार्टनर्स को कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जाए। अपनी मांगों को मनवाने के लिए संगठन ने शनिवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक देशभर में ऐप सेवाएं बंद रखने का फैसला किया है।
ईंधन के दामों में लगी आग से बिगड़ा बजट, 1.2 करोड़ कामगार प्रभावित
यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि 15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की जो एकमुश्त बढ़ोतरी की गई है, उसने जमीनी स्तर पर काम करने वाले डिलीवरी बॉयज और ड्राइवरों की कमर तोड़ दी है। लगभग चार साल के लंबे अंतराल के बाद ईंधन की कीमतों में यह पहला बड़ा बदलाव है। संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, इस फैसले का सीधा असर देश के लगभग 1.2 करोड़ गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स पर पड़ेगा। इस बड़ी आबादी में जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसी कंपनियों के फूड डिलीवरी एजेंट्स के साथ-साथ कोरियर, लॉजिस्टिक्स और बाइक टैक्सी चलाने वाले लोग शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय संकट का खामियाजा भुगत रहे कर्मचारी, कंपनियों से राहत की गुहार
यूनियन की अध्यक्ष सीमा सिंह ने इस आर्थिक संकट के लिए वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से पहले ही रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर के बढ़ते दामों ने कामगारों के घरेलू बजट को बिगाड़ रखा था। सीमा सिंह ने जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट जैसी दिग्गज टेक कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तुरंत ही राइडर्स के भुगतान ढांचे (पेआउट स्ट्रक्चर) में सुधार नहीं किया गया, तो आर्थिक तंगी के चलते बड़ी संख्या में अनुभवी गिग वर्कर्स इस काम को छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
चिलचिलाती धूप में काम करने की चुनौती, ]=5 घंटे ठप रहेंगी सेवाएं
संगठन ने अपनी मांगों के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि ये कर्मचारी रोजाना कड़कड़ाती धूप, भीषण गर्मी और धूल-प्रदूषण के बीच लगातार 10 से 12 घंटे तक मोटरसाइकिल और स्कूटर चलाकर अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में रोजाना बढ़ते पेट्रोल के खर्च का पूरा बोझ सीधे तौर पर इन्हीं की जेब पर आ रहा है। कंपनियों द्वारा दिए जा रहे मौजूदा कमीशन में अब गाड़ी का मेंटेनेंस और तेल का खर्च निकालना भी मुमकिन नहीं हो पा रहा है। इसी के विरोध में यूनियन ने देश भर के सभी ऐप आधारित कर्मचारियों से अपील की है कि वे शनिवार को तय समय पर 5 घंटे के लिए अपने स्मार्टफोन ऐप्स को पूरी तरह बंद रखकर इस हड़ताल को सफल बनाएं।



