
Pithora Liquor Adulteration: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से शराब के शौकीनों को हैरान करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। पिथौरा स्थित कंपोजिट मदिरा दुकान में ग्राहकों की आंखों में धूल झोंककर बड़े पैमाने पर चल रहे मिलावटखोरी के धंधे का भंडाफोड़ हुआ है। आबकारी विभाग की उड़नदस्ता टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर दुकान में अचानक छापा मारा। इस औचक निरीक्षण के दौरान टीम ने मदिरा दुकान के भीतर चार प्लेसमेंट कर्मचारियों को ब्रांडेड अंग्रेजी शराब में खुलेआम पानी मिलाते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। विभाग की इस त्वरित कार्रवाई से मिलावटखोर सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।
काउंटर के पीछे खुलेआम मेज पर चल रहा था सील खोलने और पानी मिलाने का गोरखधंधा
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 25 मई को आबकारी विभाग के आला अधिकारियों की एक संयुक्त टीम पिथौरा की अंग्रेजी शराब दुकान में जांच के लिए पहुंची थी। जैसे ही टीम ने दुकान के भीतर प्रवेश किया, वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। दुकान के भीतर मौजूद प्लेसमेंट कर्मचारी पूरी तरह बेखौफ होकर एक मेज पर मैकडॉवेल नंबर 1 ब्रांड की शराब के पावों (क्वार्टर) की सील तोड़ रहे थे। वे बोतलों में से कुछ मात्रा में असली शराब निकालकर उसमें सादा पानी भर रहे थे। अधिकारियों ने बिना वक्त गंवाए चारों कर्मचारियों को रंगे हाथों धर दबोचा।

सालों से एक ही जगह पर जमे थे आरोपी, लंबे समय से चल रही थी ग्राहकों से धोखाधड़ी
इस पूरे मामले की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि यह अवैध धंधा कोई नया नहीं था बल्कि काफी समय से चल रहा था। पकड़े गए आरोपियों में से उमेश मन्नाडे और करन सोनटके पिछले लगभग दो वर्षों से इसी पिथौरा दुकान में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वहीं दो अन्य आरोपी नारायण निषाद और हेमंत पटेल पिछले सात-आठ महीनों से यहां पदस्थ थे। लंबे समय तक एक ही जगह पर जमे रहने के कारण इन कर्मचारियों की स्थानीय स्तर पर पैठ मजबूत हो गई थी और इनके हौसले इतने बुलंद थे कि इन्हें पकड़े जाने का कोई डर नहीं था।
आबकारी एक्ट की धारा 38(क) के तहत केस दर्ज, पानी मिली बोतलों का जखीरा बरामद
आबकारी विभाग ने मौके से चारों आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद उनके कब्जे से भारी मात्रा में मिलावट की हुई मैकडॉवेल नंबर 1 की बोतलें जब्त की हैं। इन सभी बोतलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। विभाग ने चारों दोषी कर्मचारियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 38(क) के तहत मदिरा में अवांछित पदार्थ या पानी मिलाने का अपराध दर्ज किया है। पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस खेल में दुकान के मैनेजर या किसी अन्य रसूखदार अधिकारी की भी संलिप्तता थी या नहीं।
मिलावट के बाद तय कीमत पर बेची जा रही थी शराब, उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा था डाका
यह पूरा रैकेट न केवल ग्राहकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा था बल्कि उनकी जेब पर भी सीधा डाका डाल रहा था। कर्मचारी असली शराब को निकालकर उसे ऊंचे दामों पर अलग से बेचते थे और बोतलों में पानी मिलाकर उसे आम उपभोक्ताओं को सरकार द्वारा निर्धारित पूरी कीमत पर थमा देते थे। स्वाद में बदलाव और नशा कम होने की वजह से स्थानीय ग्राहकों द्वारा लगातार इसकी मौखिक शिकायतें की जा रही थीं, जिसके बाद आबकारी मुख्यालय ने इस गुप्त ऑपरेशन को अंजाम दिया।

विभाग की सख्त चेतावनी, मिलावटखोरी में शामिल दुकानों के ठेके और स्टाफ बदले जाएंगे
पिथौरा में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग के जिला अधिकारियों ने जिले की अन्य सभी शराब दुकानों के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि शासन की मदिरा नीति के तहत उपभोक्ताओं को शुद्ध और तय मानकों वाली शराब उपलब्ध कराना अनिवार्य है। यदि भविष्य में किसी अन्य दुकान में भी इस तरह का फर्जीवाड़ा या सील तोड़कर पानी मिलाने का मामला सामने आता है, तो वहां के पूरे स्टाफ को तत्काल बर्खास्त करने के साथ ही संबंधित प्लेसमेंट एजेंसी को भी ब्लैकलिस्ट करने की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



