
Ajay Chandrakar Targets Bhupesh Baghel: छत्तीसगढ़ की सियासत में आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर एक बार फिर घमासान मचा है। दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा राज्यपालों पर की गई टिप्पणी के बाद भाजपा नेता अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बघेल आरक्षण के नाम पर सिर्फ राजनीतिक नौटंकी कर रहे हैं और कांग्रेस का इससे कोई वास्ता नहीं है।
कांग्रेस का आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं, इतिहास खुद गवाही देता है
Kurud MLA Ajay Chandrakar: अजय चंद्राकर ने बघेल पर हमला करते हुए कहा कि जिन आरक्षण की दुहाई वे दे रहे हैं, उसका श्रेय कांग्रेस को नहीं दिया जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि:
- काका कालेलकर आयोग की सिफारिशों को नेहरू ने खारिज किया था।
- मंडल आयोग 1979 में मोरारजी देसाई ने बनाया और 1990 में वी.पी. सिंह ने उसकी सिफारिशों को लागू किया।
- ओबीसी आरक्षण लागू कराने में कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं रही।
उन्होंने पूछा, “कांग्रेस बताये कि उसका आरक्षण से क्या नाता है?”
बघेल सरकार ने खुद रिपोर्ट को दबाया, फिर खेला नौवीं अनुसूची का कार्ड
Ajay Chandrakar Statement: चंद्राकर ने बघेल सरकार पर आरोप लगाया कि दिसंबर 2022 में आरक्षण विधेयक पास करने से पहले उन्होंने अपनी ही गठित क्वांटिफायबल कमीशन रिपोर्ट को विधानसभा में नहीं रखा।
उन्होंने कहा: आयोग का कार्यकाल 10 बार बढ़ाया गया। भानुप्रतापपुर उपचुनाव के ठीक पहले आयोग से दबाव में रिपोर्ट ली गई। जब विधेयक पास नहीं हुआ तो बघेल ने उसे नौवीं अनुसूची में डालने का संकल्प लाया, जबकि वे जानते थे कि वह समीक्षा के अधीन है। चंद्राकर ने आरोप लगाया कि यह सब सिर्फ चुनावी फायदे के लिए किया गया।
बघेल का बयान मनगढ़ंत, राहुल के पास असफल सिपाही
पूर्व राज्यपाल अनुसुइया उइके द्वारा विधेयक पर हस्ताक्षर देने का मौखिक आश्वासन मिलने के बघेल के दावे को चंद्राकर ने झूठा और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा, “किसने सुना? किसी विधायक ने नहीं सुना, सिर्फ बघेल को ही कैसे सुनाई दिया?”
अजय चंद्राकर ने अंत में तीखा कटाक्ष करते हुए कहा,
मैं इसलिए कहता हूं कि राहुल गांधी के अस्तबल में सारे घोड़े लंगड़े हैं, जब राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर कोई मुद्दा नहीं मिलता तो ये लोग गड़े मुर्दे उखाड़ते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के पास आज न तो नीति है, न नियत, इसलिए मोदी और विष्णुदेव साय जैसे नेताओं के सामने कांग्रेस की एक नहीं चल रही। इस बयानबाजी से साफ है कि छत्तीसगढ़ में आरक्षण बिल को लेकर सियासी जंग तेज़ हो गई है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों से जनता को साधने में जुटे हैं।



