
CG Cervical Cancer Vaccination: छत्तीसगढ़ में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण सरकारी अभियान सुस्त रफ्तार का शिकार हो गया है। गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर से किशोरियों को बचाने के लिए शुरू किया गया निशुल्क टीकाकरण अभियान राज्य में अपनी गति नहीं पकड़ पा रहा है। इस राष्ट्रीय अभियान के तहत छत्तीसगढ़ पूरे देश में 26वें स्थान पर पिछड़ गया है। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 14 से 15 साल की करीब 2.62 लाख लड़कियों को यह जीवनरक्षक टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, शुरुआत के दो महीने बीत जाने के बाद भी अब तक महज चार प्रतिशत यानी लगभग 12 हजार किशोरियों को ही यह सुरक्षा कवच मिल सका है।
बांझपन और शारीरिक कमजोरी की अफवाहें पड़ रहीं भारी
निशुल्क और सुलभ सुविधा होने के बावजूद इस अभियान के फ्लॉप होने के पीछे सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर फैली भ्रामक अफवाहें हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों ही अंचलों में परिजनों के बीच यह गलतफहमी फैल गई है कि इस वैक्सीन को लगवाने से भविष्य में बांझपन की समस्या हो सकती है। इसके अलावा शरीर में कमजोरी आने और दूसरी गंभीर बीमारियां पनपने का डर भी लोगों के मन में बैठ गया है। इस बेबुनियाद खौफ के चलते लोग अपनी बेटियों को लेकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे हैं।
मध्यप्रदेश शत-प्रतिशत आंकड़ों के साथ अव्वल, पश्चिम बंगाल सबसे पीछे
देशव्यापी स्तर पर इस अभियान की स्थिति को देखें तो पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश ने इस मामले में मिसाल पेश की है। एमपी सरकार ने अपने तय लक्ष्य से भी अधिक बालिकाओं का टीकाकरण करके देश में पहला स्थान हासिल किया है। इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है जहां अब तक इस वैक्सीन की शुरुआत का आंकड़ा शून्य बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाली एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर एचपीवी (HPV) का टीका लगवाकर इस गंभीर खतरे को पूरी तरह टाला जा सकता है।
देश के शीर्ष 10 राज्यों में वैक्सीनेशन की स्थिति
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की देखरेख में चल रहे इस अभियान में विभिन्न राज्यों के प्रदर्शन को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:
| राज्य | कुल निर्धारित लक्ष्य | अब तक का टीकाकरण प्रतिशत |
| मध्यप्रदेश | 7.51 लाख | 100.95% |
| गुजरात | 5.40 लाख | 99.88% |
| मिजोरम | 11 हजार | 74.64% |
| बिहार | 13.65 लाख | 50.93% |
| आंध्रप्रदेश | 3.78 लाख | 50.28% |
| जम्मू कश्मीर | 1.34 लाख | 42.29% |
| कर्नाटक | 5.03 लाख | 39.29% |
| लद्दाख | 2 हजार | 32.39% |
| केरल | 2.49 लाख | 31.44% |
| हिमाचल प्रदेश | 54 हजार | 26.96% |
अस्पतालों में वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक, सुरक्षा के कड़े प्रोटोकॉल लागू
स्वास्थ्य विभाग के पास वर्तमान में इस जीवनरक्षक वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। राजधानी रायपुर के एम्स सहित प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में यह टीका मुफ्त लगाया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इसके लिए एक तय मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन होता है। टीका लगाने के बाद हितग्राही की बाईं उंगली पर अमिट स्याही से निशान लगाया जाता है और उसे आधे घंटे तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाता है।
राज्य टीकाकरण अधिकारी का दावा: टीका पूरी तरह सुरक्षित, कोई रिस्क नहीं
अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. वीआर भगत ने कहा कि एचपीवी वैक्सीन को लेकर समाज में चल रही बातें पूरी तरह निराधार हैं। इस दवा का कोई भी साइड इफेक्ट या खतरा सामने नहीं आया है और यह किशोरियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर लोगों के मन से डर निकालने और टीकाकरण का ग्राफ बढ़ाने के लिए आने वाले दिनों में एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि शत-प्रतिशत बच्चियों को सुरक्षित किया जा सके।
परीक्षा और भीषण गर्मी को बताया वजह, अब स्कूलों के जरिए सधेगा निशाना
शुरुआती दौर में इस अभियान के पिछड़ने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अपने तर्क हैं। उनका कहना है कि जब 16 मार्च को इस योजना की शुरुआत हुई थी, तब अधिकांश छात्राएं अपनी सालाना परीक्षाओं में व्यस्त थीं। इसके तुरंत बाद प्रदेश में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप शुरू हो गया, जिसके कारण अभिभावकों ने बच्चों को अस्पताल ले जाने से परहेज किया। अब विभाग ने रणनीति बदली है। नए सत्र में स्कूल खुलते ही शिक्षकों के सहयोग से क्लासरूम में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिससे बच्चियों को सीधे सेंटर्स तक लाया जा सके।



