
Takhatpur Hardi Village Liquor Shop Demand: छत्तीसगढ़ की साय सरकार जनता की समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रदेश भर में ‘सुशासन तिहार’ का आयोजन कर रही है। आमतौर पर इन शिविरों में लोग सड़क, बिजली, पानी या राशन कार्ड जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग लेकर पहुंचते हैं, लेकिन बिलासपुर के तखतपुर क्षेत्र में एक अनोखा मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत हरदी में आयोजित जिला स्तरीय शिविर में ग्रामीणों ने क्षेत्र में शासकीय देशी और अंग्रेजी शराब दुकान खोलने के लिए बाकायदा आवेदन सौंपा है। ग्रामीणों का तर्क है कि सरकारी दुकान खुलने से इलाके में पैर पसार चुके अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लगेगी।
अवैध शराब और जहरीले केमिकल का डर
सोनबंधा पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि विवेकानंद दिवाकर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण इस शिविर में पहुंचे। उन्होंने प्रशासन को बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से कच्ची महुआ शराब की अवैध बिक्री धड़ल्ले से चल रही है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि अधिक लाभ कमाने के चक्कर में शराब तस्कर इसमें घातक केमिकल मिला रहे हैं, जिससे लोगों की सेहत और जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि सरकार यहां अधिकृत दुकान खोल देती है, तो लोगों को कम से कम मानक स्तर की शराब मिलेगी और मिलावटखोरी का डर खत्म होगा।

शराब के लिए 15 किलोमीटर का चक्कर और तस्करों का आतंक
सरपंच प्रतिनिधि ने आवेदन में उल्लेख किया है कि वर्तमान में क्षेत्र के लोगों को शराब खरीदने के लिए 10 से 15 किलोमीटर दूर तक का सफर तय करना पड़ता है। इस मजबूरी का फायदा उठाकर स्थानीय तस्कर ऊंचे दामों पर और घटिया स्तर की शराब गांव-गांव तक पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सरकारी भट्ठी खुलने से न केवल लोगों की भागदौड़ कम होगी, बल्कि शासन द्वारा तय कीमतों पर पारदर्शी तरीके से शराब उपलब्ध हो सकेगी। उनका दावा है कि इस कदम से शराब माफियाओं का नेटवर्क भी पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा।
सुशासन तिहार के माध्यम से प्रशासन से गुहार
ग्रामीणों ने सुशासन तिहार शिविर को अपनी बात रखने का सबसे सही मंच माना और अधिकारियों से इस मांग पर जल्द विचार करने की अपील की। आवेदन में मांग की गई है कि हरदी क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और बढ़ती अवैध बिक्री को देखते हुए यहां जल्द से जल्द शासकीय देशी एवं अंग्रेजी शराब दुकान की स्वीकृति दी जाए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और आबकारी विभाग ग्रामीणों की इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं, क्योंकि आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में शराब दुकानों का विरोध देखने को मिलता है, लेकिन यहां कहानी पूरी तरह उलट है।



