
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर में क्षेत्रीय भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी के बीच का विवाद अब पूरी तरह से कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है। इस हाई-प्रोफाइल प्रशासनिक और राजनीतिक टकराव में पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के बाद क्रॉस एफआईआर दर्ज की है। हालांकि, पुलिसिया कार्रवाई को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं क्योंकि जहां एक तरफ सत्ताधारी दल के विधायक और उनके समर्थकों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत मुकदमा कायम किया गया है, वहीं दूसरी तरफ महिला से अभद्रता के आरोपी सरकारी अधिकारी को जमानती धाराओं का लाभ मिला है।
विधायक की बहन से बदसलूकी का आरोप, नायब तहसीलदार के खिलाफ जमानती धाराओं में केस दर्ज
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब भाजपा विधायक की बहन किसी काम से तहसील कार्यालय पहुंची थीं। उन्होंने नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीतापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप है कि सरकारी दफ्तर के भीतर अफसर ने उनके साथ जातिगत गाली-गलौज की, अश्लील इशारे किए और बदसलूकी करते हुए धक्का-मुक्की कर उन्हें बलपूर्वक केबिन से बाहर निकाल दिया। इस महिला उत्पीड़न की शिकायत पर सरगुजा पुलिस ने नायब तहसीलदार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 296, 351(2) और 79 के तहत मामला तो दर्ज किया, लेकिन ये सभी धाराएं जमानती हैं।

अफसर की शिकायत पर विधायक और समर्थकों पर शिकंजा, लगीं कई गंभीर गैर-जमानती धाराएं
दूसरी ओर, नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने भी विधायक और उनके करीबियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जवाबी रिपोर्ट दर्ज कराई है। अफसर की लिखित शिकायत पर पुलिस ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो, उनके सहयोगियों यूसुफ, नाजिम रजा, पंकज गुप्ता सहित करीब 10 से 12 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने और मारपीट के इस मामले में सख्ती दिखाते हुए बीएनएस की धारा 221, 121(1), 191(2) और 132 जैसी गंभीर और गैर-जमानती धाराओं को प्रभावी किया है, जिससे विधायक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सीतापुर की घटना लेकिन अंबिकापुर में शून्य पर दर्ज हुई एफआईआर, प्रशासनिक फैसले पर उठे सवाल
इस कानूनी प्रक्रिया में एक और तकनीकी पेंच सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली को संदेहास्पद बना दिया है। कथित विवाद की पूरी घटना सीतापुर थाना क्षेत्र की है, जहां विधायक की बहन की रिपोर्ट तुरंत दर्ज कर ली गई। इसके विपरीत, नायब तहसीलदार की तहरीर घटना स्थल से करीब 50 किलोमीटर दूर अंबिकापुर थाने में ‘शून्य’ पर दर्ज कराई गई। सूत्रों के मुताबिक, जिला और संभाग स्तर पर बैठे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने आपसी सहमति से यह फैसला लिया कि अफसर की रिपोर्ट जिला मुख्यालय में ही दर्ज हो। कानून के जानकारों का कहना है कि क्षेत्र में ऐसी कोई आपातकालीन स्थिति नहीं थी कि नायब तहसीलदार खुद सीतापुर थाने जाकर अपनी रिपोर्ट दर्ज नहीं करा सकते थे।

सुशासन सरकार में पहले बीजेपी विधायक जिन पर हुआ केस, थाना परिसर में आपस में भिड़े दोनों गुट
वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में रामकुमार टोप्पो पहले ऐसे सत्ताधारी दल के विधायक बन गए हैं जिनके खिलाफ पुलिस ने इतनी गंभीर गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। यह राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय है कि खुद विधायक की बहन शासकीय अमले की बदसलूकी का शिकार हुई और पुलिस ने आरोपी अफसर को राहत दे दी। इधर, एफआईआर दर्ज होने के बाद अंबिकापुर थाना परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। एक तरफ कार्रवाई की मांग को लेकर जुटे विधायक समर्थक और दूसरी तरफ अफसर के समर्थन में उतरे राजस्व निरीक्षक संघ के पदाधिकारी आमने-सामने आ गए और जमकर नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस को थाने की सुरक्षा बढ़ानी पड़ी।

विधायक बोले जांच में पूरा सहयोग करूंगा, राजस्व संघ ने दी 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी की चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक रामकुमार टोप्पो ने खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि नायब तहसीलदार ने उनकी बड़ी बहन के साथ घोर दुर्व्यवहार किया था, जिसके कारण ही स्थिति बिगड़ी। विधायक ने कहा कि वे कानून का सम्मान करते हैं और जांच में पुलिस का पूरा सहयोग करेंगे, यदि वे दोषी पाए जाते हैं तो उन पर कार्रवाई हो। दूसरी तरफ, नाराज राजस्व निरीक्षक संघ के पदाधिकारियों ने अल्टीमेटम जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर विधायक की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो पूरे संभाग में राजस्व कार्य ठप कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।



