बेटियों के मान में छत्तीसगढ़ अव्वल: लिंगानुपात के मामले में देश में नंबर-1 बना प्रदेश, केरल और हिमाचल को भी पछाड़ा

लैंगिक समानता और बेटियों के संरक्षण के मामले में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में मिसाल पेश की है। नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जन्म के समय लिंगानुपात (SRB) के मामले में छत्तीसगढ़ देश के तमाम राज्यों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष पर पहुंच गया है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में प्रति 1000 लड़कों पर 974 लड़कियां जन्म ले रही हैं। यह आंकड़ा न केवल राष्ट्रीय औसत 929 से काफी बेहतर है बल्कि केरल और हिमाचल प्रदेश जैसे विकसित राज्यों से भी आगे है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर मिली गौरवमयी उपलब्धि

24 जनवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए यह खबर बड़ी सौगात लेकर आई है। यह दिन बालिकाओं के अधिकारों, उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित है। राज्य की यह कामयाबी दर्शाती है कि यहां बेटियों के प्रति सामाजिक नजरिया तेजी से बदल रहा है। शासन की नीतियों और जमीनी स्तर पर चल रहे अभियानों के कारण अब बेटियों के जन्म को बोझ नहीं बल्कि गौरव माना जा रहा है।

कानून की सख्ती: भ्रूण परीक्षण पर कड़ा पहरा

छत्तीसगढ़ में पीसीपीएनडीटी (PC-PNDT) अधिनियम 1994 को बेहद कड़ाई से लागू किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड केंद्रों और आईवीएफ क्लीनिकों पर पैनी नजर रखी है ताकि गर्भ में लिंग परीक्षण जैसी अवैध गतिविधियों को पूरी तरह रोका जा सके। नियमित निरीक्षण और पारदर्शी पंजीकरण प्रक्रिया के जरिए तकनीक के दुरुपयोग पर लगाम कसी गई है। जिला और राज्य स्तर की समितियां लगातार बैठकों के जरिए कानून का उल्लंघन करने वालों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित कर रही हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता का दिखा असर

राज्य में लिंगानुपात में सुधार के पीछे स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की बड़ी भूमिका रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किशोरियों के सशक्तिकरण और भेदभाव मिटाने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर अनिवार्य रूप से सूचनाओं का प्रदर्शन और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की सख्त मॉनिटरिंग ने लोगों के मन से लिंग आधारित भेदभाव को कम करने में मदद की है। समाज में आई इस चेतना ने बेटियों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखी है।

सामूहिक प्रयास और सरकारी संकल्प की जीत

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस उपलब्धि का श्रेय स्वास्थ्य कर्मियों, महिला समूहों, चिकित्सकों और जनप्रतिनिधियों के संयुक्त प्रयासों को दिया है। उन्होंने कहा कि 974 का आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संकल्प को धरातल पर उतारने में सफल रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में पीसीपीएनडीटी एक्ट का पालन और भी कड़ाई से हो ताकि प्रदेश की हर बालिका सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में बड़ी हो सके।

भविष्य के लिए नई उम्मीदें और चुनौतियां

हालांकि छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है लेकिन प्रशासन अब इस आंकड़े को और बेहतर करने की दिशा में काम कर रहा है। आने वाले समय में उन जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां लिंगानुपात औसत से थोड़ा कम है। सरकार का मानना है कि जब तक समाज का हर तबका बेटियों को समान अवसर देने के लिए आगे नहीं आएगा तब तक पूर्ण लैंगिक समानता का लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा। वर्तमान सफलता ने राज्य के आत्मविश्वास को जरूर बढ़ाया है।

Also Read: छत्तीसगढ़ में वूमन्स पॉवर: बैंकों को भाया महिलाओं का भरोसा, 5 साल में दोगुना से ज्यादा बढ़ा लोन

दक्षिण कोसल का Whatsapp Group ज्वाइन करे

Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

Related Articles

Back to top button