
बलरामपुर में बीजेपी विधायक शकुंतला पोर्ते के कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले की सुनवाई गुरुवार 11 दिसंबर को निर्धारित थी, लेकिन कार्यवाही एक बार फिर स्थगित कर दी गई। प्रशासन ने अब अगली सुनवाई के लिए 29 दिसंबर की तारीख तय की है। मामले को लेकर जिले में लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई है।
पिछली सुनवाई के बाद बढ़ी सुरक्षा
शकुंतला पोर्ते प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और उनका जाति प्रमाण पत्र जांच के दायरे में है। इस मामले में पिछली सुनवाई 27 नवंबर को हुई थी। उस दिन बड़ी संख्या में सर्व आदिवासी समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे थे, जिसके बाद वहां तनाव बढ़ गया था। इसी वजह से प्रशासन ने 11 दिसंबर को जिला कार्यालय के 500 मीटर दायरे में धारा 144 लागू की।
कलेक्ट्रेट परिसर में कड़ी निगरानी
छानबीन समिति की बैठक बलरामपुर कलेक्ट्रेट में रखी गई थी। संभावित भीड़ और विरोध को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया। अधिकारियों का कहना है कि पिछले अनुभवों को देखते हुए किसी भी तरह की अव्यवस्था रोकने के लिए यह कदम उठाया गया। सुरक्षा व्यवस्था के चलते कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाकों में कड़ी निगरानी रखी गई।
प्रमाण पत्र पर सवाल और जांच की प्रक्रिया
विधायक पोर्ते का जाति प्रमाण पत्र उनके पति के आधार पर जारी बताया गया है, जबकि नियमों के अनुसार प्रमाण पत्र पिता की जाति के आधार पर जारी होता है। इस विसंगति को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जिसके बाद अदालत ने कलेक्टर को छानबीन समिति बनाकर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। समिति ने पोर्ते को नोटिस भेजकर मूल दस्तावेज पेश करने को कहा है।
29 दिसंबर को आगे बढ़ेगी कार्यवाही
समिति दस्तावेजों की जांच और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में है। अगली सुनवाई 29 दिसंबर को होगी, जिसमें समिति की प्रगति और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आगे की दिशा तय होगी। जिले में इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर लगातार चर्चा जारी है।



