TET की अनिवार्यता पर छिड़ा घमासान: दिल्ली के रामलीला मैदान में जुटेंगे देशभर के शिक्षक, 4 अप्रैल को बड़ा आंदोलन

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य बनाने के फैसले ने छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश समेत पूरे देश के शिक्षा जगत में हलचल मचा दी है। इस नियम के विरोध में अब शिक्षकों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल राष्ट्रीय आंदोलन होने जा रहा है। इस प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ के हजारों शिक्षक भी शामिल होंगे, जो अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा निकायों पर दबाव बनाएंगे। शिक्षकों का कहना है कि दशकों से सेवाएं दे रहे अनुभवी गुरुजी पर अब परीक्षा थोपना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

सुप्रीम कोर्ट पर टिकी नजरें: 2 अप्रैल की सुनवाई तय करेगी शिक्षकों का भविष्य

दिल्ली में होने वाले बड़े प्रदर्शन से ठीक पहले 2 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं को एक साथ जोड़कर सुनने का फैसला किया है। शिक्षकों को उम्मीद है कि अदालत उनके अनुभव और सेवाकाल को देखते हुए टीईटी की अनिवार्यता से राहत दे सकती है। इस सुनवाई के नतीजों के आधार पर ही तय होगा कि सरकारी स्कूलों में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों को फिर से परीक्षा देनी होगी या उन्हें इस नियम से छूट मिलेगी।

दिल्ली कूच की तैयारी: छत्तीसगढ़ के हर जिले से रवाना हो रहे हैं शिक्षक समूह

आंदोलन को सफल बनाने के लिए छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से शिक्षकों का दिल्ली जाने का सिलसिला शुरू हो चुका है। टीचर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केदार जैन और मनीष मिश्रा के नेतृत्व में प्रदेश की बड़ी टीम दिल्ली के लिए रवाना हो रही है। संगठन का तर्क है कि जो शिक्षक 2009 से पहले भर्ती हुए हैं और जिनके पास लंबा अनुभव है, उन्हें पात्रता परीक्षा के दायरे में लाना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। शिक्षकों की मांग है कि या तो नियमों को सरल बनाया जाए या पुराने शिक्षकों को इससे पूरी तरह मुक्त रखा जाए।

50 लाख शिक्षकों पर संकट: एक आदेश से पूरे देश में मची खलबली

दरअसल, 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद से देशभर के करीब 50 लाख शिक्षकों के करियर पर तलवार लटक गई है। इसी आदेश को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ लोक शिक्षण संचालनालय ने 2 मार्च 2026 को एक पत्र जारी किया, जिसमें 2009 से पहले भर्ती हुए शिक्षकों के लिए भी टीईटी अनिवार्य कर दी गई। इस आदेश ने उन शिक्षकों में भारी असमंजस पैदा कर दिया है जो अपनी सेवानिवृत्ति के करीब हैं। देशभर के शिक्षक संगठनों ने इसे शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) की गलत व्याख्या करार दिया है।

आदेश की व्याख्या पर सवाल: क्या केवल अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए था नियम?

एनसीईआरटी के पूर्व सदस्य दामोदर जैन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का मूल आदेश संभवतः उन अल्पसंख्यक संस्थाओं के लिए था जहां धार्मिक शिक्षा दी जाती है। उनके मुताबिक, कोर्ट ने करीब 25 याचिकाओं को क्लब करके फैसला सुनाया था, जिसे सरकारी शिक्षकों पर गलत तरीके से लागू किया जा रहा है। जैन का तर्क है कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सरकारी शिक्षकों का इस आदेश से कोई सीधा संबंध नहीं होना चाहिए। इस कानूनी पेच के कारण ही अब मामला फिर से अदालत की चौखट पर पहुंचा है।

आरटीई का हवाला: नियमों में नहीं है पुरानी भर्ती पर परीक्षा का जिक्र

विशेषज्ञों के अनुसार, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 21 में कहीं भी पुराने शिक्षकों के लिए दोबारा पात्रता परीक्षा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। नियम यह कहता है कि यदि कोई शिक्षक तत्कालीन न्यूनतम मापदंड पूरे नहीं करता है, तो उसे अगले पांच साल में योग्यता हासिल करनी होगी। लेकिन सालों से पढ़ा रहे शिक्षकों को अब टीईटी के लिए मजबूर करना नियमों के विपरीत माना जा रहा है। इस तकनीकी खामी को ही शिक्षक संगठन अपना सबसे बड़ा हथियार बना रहे हैं।

खेल शिक्षकों में संशय: आदेश की स्पष्टता न होने से बढ़ी परेशानी

शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश में कई बिंदुओं पर तस्वीर साफ नहीं है। सबसे बड़ा सवाल खेल शिक्षकों को लेकर उठ रहा है। विभागीय आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि क्या प्राथमिक शालाओं के खेल शिक्षकों को भी टीईटी परीक्षा में बैठना अनिवार्य होगा? ऐसी ही अस्पष्टता के कारण अलग-अलग संवर्ग के शिक्षक डरे हुए हैं। 4 अप्रैल का आंदोलन न केवल इस अनिवार्यता के खिलाफ है, बल्कि विभाग से इन सभी उलझनों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी कर रहा है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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