
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का असर अब छत्तीसगढ़ की रसोई तक पहुंच गया है। एलपीजी गैस की किल्लत और कमर्शियल सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों के बीच आम जनता की उम्मीद अब सरकारी राशन दुकानों (उचित मूल्य की दुकानों) पर टिकी है। प्रशासन ने राहत देने के लिए प्रत्येक कार्ड धारक को 2-2 लीटर केरोसिन बांटने का फरमान तो जारी कर दिया है, लेकिन हकीकत यह है कि मार्च खत्म होने के बाद भी अधिकांश दुकानों तक स्टॉक नहीं पहुंचा है। लोग केरोसिन की आस में दुकानों के चक्कर काट रहे हैं, पर उन्हें खाली ड्रम देखकर मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
2-2 लीटर केरोसिन का आदेश: राहत की घोषणा पर जमीन पर स्टॉक गायब
खाद्य विभाग ने शहरी क्षेत्रों के राशन कार्ड धारकों को ईंधन के विकल्प के रूप में 2 लीटर केरोसिन देने का निर्णय लिया है। इसके लिए बाकायदा 240 किलोलीटर (केएल) तेल का आवंटन भी किया गया। राजनांदगांव की दो प्रमुख एजेंसियों को दुकानों तक सप्लाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें मेसर्स मनसुखलाल प्रागजी भाई को 144 केएल और मेसर्स अहमद भाई को 96 केएल तेल आवंटित हुआ है। कागजों पर तो आवंटन हो चुका है, लेकिन वितरण व्यवस्था की सुस्ती के कारण हितग्राहियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
11 शहरों के लिए विशेष योजना: रायपुर समेत बड़े केंद्रों में शुरू होना था वितरण
केरोसिन वितरण की यह योजना प्रदेश के 11 प्रमुख शहरी इलाकों के लिए बनाई गई है। इसमें रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, सरगुजा, रायगढ़, कोरबा, बलौदाबाजार, महासमुंद, जांजगीर और बेमेतरा जैसे जिले शामिल हैं। अकेले रायपुर और उसके आसपास की 297 दुकानों में केरोसिन का भंडारण किया जाना है। इन दुकानों से जुड़े 3 लाख 20 हजार से ज्यादा कार्डधारकों को इस योजना का लाभ मिलना है। हालांकि, सप्लाई चेन में आई रुकावट ने इस पूरी योजना को फिलहाल अधर में लटका दिया है।
ग्राउंड रिपोर्ट: गुढ़ियारी से कोटा तक खाली हाथ लौट रहे कार्डधारक
जब शहर की अलग-अलग राशन दुकानों की पड़ताल की गई, तो दावों की पोल खुल गई। रायपुर के गुढ़ियारी, कोटा और संजय नगर जैसे इलाकों की दुकानों में अब तक केरोसिन का एक कतरा भी नहीं पहुंचा है। कई दुकानदारों का कहना है कि उनके पास तेल रखने के लिए ड्रम और अन्य संसाधन तो हैं, लेकिन ऊपर से सप्लाई ही नहीं आ रही है। दूसरी तरफ, कुछ दुकानदार यह तर्क दे रहे हैं कि अब लोग केरोसिन की मांग कम करते हैं, इसलिए वे भंडारण को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं हैं।
महंगाई की डबल मार: 63.5 रुपये लीटर मिल रहा है केरोसिन
गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों के बीच केरोसिन भी अब सस्ता नहीं रह गया है। वर्तमान में सरकारी दुकानों पर इसकी कीमत 63.5 रुपये प्रति लीटर तय की गई है। इसके बावजूद, गैस की किल्लत और महंगी रिफिलिंग की वजह से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार केरोसिन को एक बेहतर विकल्प मान रहे हैं। लेकिन दुकानों से खाली हाथ लौटने की वजह से उन्हें अब खुले बाजार से ऊंचे दामों पर ईंधन खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
एजेंसियों की सुस्ती: आवंटन के बाद भी नहीं पहुंचा तेल
राशन दुकानों तक केरोसिन पहुंचाने की जिम्मेदारी जिन एजेंसियों को दी गई है, उनके कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। आवंटन आदेश जारी हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन एजेंसियों ने अब तक मांग के अनुसार तेल की सप्लाई पूरी नहीं की है। कुछ ही गिनी-चुनी दुकानों में नाममात्र का स्टॉक भेजा गया है, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। प्रशासन ने अब इन एजेंसियों को सख्त हिदायत दी है कि वे जल्द से जल्द सभी वार्डों की दुकानों में स्टॉक की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
अप्रैल से सख्ती की तैयारी: विभाग ने कहा- अब तेज होगा भंडारण
खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मार्च महीने में आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी, इसलिए तकनीकी कारणों से कुछ देरी हुई है। अब अप्रैल महीने से सभी उचित मूल्य की दुकानों में केरोसिन का भंडारण अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि जो दुकानदार स्टॉक लेने में आनाकानी करेंगे या हितग्राहियों को केरोसिन उपलब्ध नहीं कराएंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले हफ्ते में सप्लाई सामान्य हो जाएगी और कार्डधारकों को राशन के साथ तेल भी मिलने लगेगा।



