
बस्तर ब्लॉक के पिपलावंड क्षेत्र में चल रही खदानों को लेकर ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया है। गुरुवार को आयोजित लोक सुनवाई के दौरान प्रभावित इलाकों के सैकड़ों ग्रामीण एकजुट हुए और वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों का घेराव कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में संचालित 14 खदानों की वजह से उनका जीना दुश्वार हो गया है। सुनवाई के दौरान जब अपर कलेक्टर, एसडीएम और खनिज विभाग के अधिकारियों ने उनकी मांगों पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो ग्रामीण भड़क गए। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मौके पर मौजूद पुलिस बल को बीच-बचाव करना पड़ा।
ब्लास्टिंग से टूट रहे घर और दूषित हो रहा पानी
ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याओं का पुलिंदा रखते हुए कहा कि खदानों में होने वाली भारी ब्लास्टिंग से उनके घरों की दीवारें फट रही हैं और छतों का मलबा गिर रहा है। प्रदूषण की वजह से न केवल खेती चौपट हो रही है, बल्कि पीने के पानी के स्रोत भी जहरीले और दूषित हो गए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और उद्योगपतियों के बीच मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि खनन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उनका दावा है कि जिस खसरा नंबर पर खदानें संचालित की जा रही हैं, वहां सालों से उनके मकान बने हुए हैं, फिर भी उन्हें नजरअंदाज कर लीज दे दी गई।
बार-बार की शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों का सबसे बड़ा गुस्सा इस बात पर था कि वे पिछले कई महीनों से प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी बात अनसुनी की जा रही है। उन्होंने कहा कि हर बार केवल जांच का भरोसा दिया जाता है, लेकिन धरातल पर खदानों का काम बंद नहीं होता। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति करने के लिए लोक सुनवाई का ढोंग कर रहा है, जबकि प्रभावित जनता के हितों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। फिलहाल पिपलावंड और आसपास के गांवों में भारी तनाव का माहौल बना हुआ है।

स्थाई समाधान न मिलने पर दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
लोक सुनवाई के अंत में ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी कि यदि खदानों के संचालन और प्रदूषण के मुद्दे का स्थाई समाधान नहीं निकला, तो वे बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने सड़कों पर चक्काजाम और खदानों का काम ठप करने की बात कही है। प्रशासन अब ग्रामीणों को शांत करने की कोशिश में जुटा है, लेकिन लोगों का कहना है कि जब तक उनकी पैतृक जमीन और सुरक्षित आवास का हक बहाल नहीं होता, उनका विरोध जारी रहेगा।



