छत्तीसगढ़ में सरकारी छुट्टियों पर ब्रेक: 23 मार्च से कर्मचारियों के अवकाश पर रोक, कलेक्टर ने जारी किया सख्त आदेश

छत्तीसगढ़ में आगामी जनगणना-2027 की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। जनगणना के विशाल कार्य को समय पर और बिना किसी बाधा के पूरा करने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी की ओर से जारी ताजा आदेश के मुताबिक, जिले के सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर तत्काल प्रभाव से अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन का तर्क है कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के काम में हर एक कर्मचारी की मौजूदगी अनिवार्य है, ताकि आंकड़ों के संकलन में कोई चूक न हो।

जनगणना 2027 की तैयारी: मकानों की गिनती के लिए कसी कमर

प्रदेश में जनगणना प्रक्रिया का पहला चरण 1 मई 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान मकानों की सूची तैयार करने और मकानों की गणना (Houselisting) का काम किया जाना है। चूंकि यह पूरी प्रक्रिया का आधार होता है, इसलिए इसकी तैयारी के लिए प्रशासनिक अमले को पहले से ही मैदान में उतरना होगा। यही वजह है कि कलेक्टर ने 23 मार्च 2026 से ही छुट्टियों पर रोक लगाने का फैसला किया है, ताकि प्रशिक्षण और सर्वे की रूपरेखा समय रहते तैयार की जा सके।

23 मार्च से 10 जून तक पाबंदी: पहले से मंजूर छुट्टियां भी रद्द

प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, 23 मार्च से 10 जून 2026 के बीच कोई भी नियमित अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। आदेश में यह भी साफ कर दिया गया है कि जिन कर्मचारियों ने 23 मार्च से पहले ही छुट्टियां मंजूर करा ली थीं, उनकी छुट्टियां भी अब स्वतः निरस्त मानी जाएंगी। केवल गंभीर बीमारी या बेहद अपरिहार्य परिस्थितियों में ही विशेष अनुमति के बाद छुट्टी मिल सकेगी, लेकिन इसके लिए खुद कलेक्टर या प्रमुख जनगणना अधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

मुख्यालय छोड़ने पर सख्त मनाही: हर वक्त रहना होगा ‘ऑन ड्यूटी’

छुट्टियों पर रोक के साथ-साथ कर्मचारियों के मुख्यालय छोड़ने पर भी कड़ा पहरा लगा दिया गया है। जनगणना कार्य से जुड़े किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बिना लिखित अनुमति के अपना कार्यक्षेत्र या मुख्यालय छोड़ने की इजाजत नहीं होगी। प्रशिक्षण सत्रों, फील्ड वर्क की योजना बनाने और पर्यवेक्षण के लिए सभी कर्मचारियों को हर समय उपलब्ध रहना होगा। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि देश की भविष्य की नीतियों का आधार है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अनुशासन और निष्ठा की परीक्षा: लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

कलेक्टर ने सभी विभागों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि जनगणना जैसे संवेदनशील काम में अनुशासन सबसे जरूरी है। आदेश में चेतावनी दी गई है कि जो भी कर्मचारी इस दौरान बिना अनुमति के गायब पाया जाएगा या काम में लापरवाही बरतेगा, उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जनगणना कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए पूरे जिले के प्रशासनिक ढांचे को एक टीम की तरह काम करने की हिदायत दी गई है।

मेडिकल लीव पर राहत: बीमारी की स्थिति में मिलेंगे विशेष अधिकार

सख्त पाबंदियों के बीच प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए चिकित्सा अवकाश (Medical Leave) के नियमों में कुछ छूट दी है। यदि कोई कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार होता है, तो सक्षम प्राधिकारी की जांच और अनुमति के बाद उसके अवकाश को यथावत रखा जा सकता है। हालांकि, इसके लिए पुख्ता मेडिकल प्रमाण पत्र और वरिष्ठ अधिकारियों की संस्तुति जरूरी होगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि किसी भी जरूरी कर्मचारी की कमी से जनगणना का कार्य प्रभावित न हो और 10 जून तक सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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