
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर सांगठनिक ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन करने जा रहा है। इस नई कवायद के तहत देशभर में ‘प्रांत प्रचारक’ का पद समाप्त किया जा रहा है और इसकी जगह विकेंद्रीकरण की नीति अपनाई जा रही है। छत्तीसगढ़ में भी संगठन की सीमाएं बदलने की तैयारी है। माना जा रहा है कि इस महीने के अंत तक या अगले साल मार्च तक संघ का नया नक्शा पूरी तरह अस्तित्व में आ जाएगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य समाज सुधार के कार्यक्रमों को निचले स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करना है।
खत्म होगी प्रांत प्रचारक की जिम्मेदारी: टोपलाल वर्मा को मिल सकती है नई भूमिका
संघ के नीतिगत फैसले के अनुसार छत्तीसगढ़ में वर्तमान में कार्यरत प्रांत प्रचारक टोपलाल वर्मा का पद अब समाप्त हो जाएगा। सूत्रों की मानें तो उन्हें संगठन में कोई नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में संघ प्रचारक के रूप में डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना काम देख रहे हैं। संघ का मानना है कि पुराने ढांचे की समीक्षा के बाद अब शक्ति के विकेंद्रीकरण की जरूरत है ताकि सांगठनिक गतिविधियों को और अधिक सुव्यवस्थित और तेज किया जा सके।
छत्तीसगढ़ में बनेंगे दो संभाग: जिलों का नया बंटवारा तय
प्रशासनिक रूप से छत्तीसगढ़ में भले ही पांच संभाग हों, लेकिन संघ अपने काम काज के लिए पूरे प्रदेश को दो प्रमुख संभागों में बांटने जा रहा है। इस नए विभाजन में जिलों को इस तरह जोड़ा जाएगा:
- प्रथम संभाग: इसमें रायपुर, दुर्ग और बस्तर प्रशासनिक संभागों के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों को शामिल किया जाएगा।
- द्वितीय संभाग: इस संभाग की सीमाओं में बिलासपुर और सरगुजा प्रशासनिक संभागों के जिले रहेंगे।मध्य प्रदेश में भी इसी तरह का बदलाव करते हुए तीन संभाग बनाए जाने की सूचना है। इस बंटवारे से क्षेत्रीय स्तर पर काम करने में आसानी होगी।
युवाओं के हाथों में होगी कमान: देश भर में बनेंगे 85 संभाग
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद देशभर में काम कर रहे 46 प्रांत प्रचारकों की जगह अब करीब 85 से अधिक ‘संभाग प्रचारक’ नियुक्त किए जाएंगे। संघ का इरादा इन महत्वपूर्ण पदों पर युवाओं को आगे लाने का है। युवा ऊर्जा के दम पर संघ अपनी शाखाओं का विस्तार विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों तक करना चाहता है। बीते एक साल में ही देश में 3,943 नई शाखाएं शुरू की गई हैं। विकेंद्रीकरण के बाद यह संख्या और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
समय के साथ बदल रहा संघ: मूल परंपराओं के साथ आधुनिकता का मेल
संघ अपनी मूल विचारधारा और परंपराओं को कायम रखते हुए आधुनिक समय की चुनौतियों के अनुसार खुद को ढाल रहा है। वर्तमान में संघ का पूरा ध्यान सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, परिवार प्रबोधन, नागरिक अनुशासन और आत्मनिर्भरता जैसे गंभीर विषयों पर है। शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में भी इन्हीं बिंदुओं को प्राथमिकता दी जा रही है। संघ नेतृत्व का मानना है कि नई व्यवस्था से इन सामाजिक सुधारों को जमीनी स्तर पर लागू करना बहुत सरल हो जाएगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फोकस: यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया का सहारा
संघ ने अब अपनी नीतियों और संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए तकनीक का हाथ थाम लिया है। अब सोशल मीडिया के माध्यम से संघ की रीतियों का प्रभावी प्रचार किया जा रहा है। विशेष रूप से युवाओं को जोड़ने के लिए लोकप्रिय यूट्यूबर्स के जरिए देशहित के संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। शताब्दी वर्ष का समापन इस साल दशहरे के मौके पर होगा, जिसके लिए डिजिटल मीडिया पर बड़े स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शाखाओं का जाल बिछाने का लक्ष्य
संभाग प्रचारकों की नियुक्ति के बाद सबसे पहला कार्य ग्रामीण अंचलों में संघ की पैठ मजबूत करना होगा। संघ का मानना है कि असली भारत गांवों में बसता है और सामाजिक समरसता का संदेश वहां तक पहुंचना अनिवार्य है। संभागों के छोटे होने से प्रचारकों के लिए हर शाखा तक पहुंचना और स्वयंसेवकों से सीधा संवाद करना आसान हो जाएगा। संगठन की इस नई सर्जरी का असर आने वाले कुछ महीनों में शाखाओं की बढ़ती संख्या के रूप में स्पष्ट दिखने लगेगा।



