
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर आज मगरलोड में केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। जिला अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर और ब्लॉक अध्यक्ष विनीत बाफना के नेतृत्व में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने मगरलोड से कुरूद जाने वाले मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीचों-बीच धान से भरे कट्टे रखकर आवाजाही रोक दी और सरकार विरोधी नारेबाजी की। करीब तीन घंटे तक चले इस हंगामे के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने पर बवाल
कांग्रेस के इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम में हुआ बदलाव है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने कानून के नाम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटा दिया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे देश की आत्मा और गरीबों के मसीहा का अपमान बताया है। कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि योजना का नाम पहले की तरह ही रखा जाए। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
धान खरीदी की तारीख बढ़ाने की मांग
चक्काजाम के दौरान कांग्रेस ने किसानों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। नेताओं ने कहा कि प्रदेश में कई किसान अब भी अपना धान नहीं बेच पाए हैं, इसलिए धान खरीदी की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 28 फरवरी किया जाना चाहिए। सड़क पर धान की बोरियां रखकर कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार की नीतियां किसान विरोधी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते खरीदी की मियाद नहीं बढ़ाई गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

बजट में कटौती और भुगतान में देरी का आरोप
धरना स्थल पर मौजूद वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को जानबूझकर कमजोर करने का आरोप लगाया। ब्लॉक अध्यक्ष विनीत बाफना ने कहा कि योजना के बजट में लगातार कटौती की जा रही है और मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भुगतान की जटिल प्रक्रियाओं के कारण ग्रामीण इलाकों में काम के अवसर कम हो रहे हैं, जिसका सीधा असर गांव की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कांग्रेस का दावा है कि यह मजदूरों के हक पर सीधा हमला है।
राष्ट्रपिता के अपमान को बताया प्रशासनिक साजिश
जिला अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने अपने संबोधन में कहा कि मनरेगा से गांधी जी का नाम हटाना महज एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी धीरे-धीरे इस क्रांतिकारी योजना को खत्म करना चाहती है। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वे गांधीवादी मूल्यों और ग्रामीण रोजगार की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
भारी संख्या में जुटे कार्यकर्ता और पुलिस बल
इस प्रदर्शन में मगरलोड ब्लॉक के कई दिग्गज नेताओं सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। तहसीलदार को ज्ञापन सौंपने के बाद कांग्रेसियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन में मनरेगा का नाम बहाल करने और किसानों को राहत देने की मांगों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।



