
छत्तीसगढ़ में स्कूलों के भीतर होने वाली फेयरवेल पार्टियों और अन्य समारोहों के लिए अब कड़े नियम लागू कर दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बालक अधिकार संरक्षण आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि छात्र अपनी ओर से किसी पार्टी या फंक्शन का आयोजन करते हैं, तो इसकी लिखित सूचना शाला प्रबंधन को देना अनिवार्य होगा। बिना पूर्व जानकारी के किसी भी प्रकार के सार्वजनिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जाएगी, ताकि स्कूल प्रशासन को होने वाली गतिविधियों का पहले से पता रहे।
जोखिम भरे स्टंट पर पूरी तरह रोक
आयोग ने देखा है कि फेयरवेल के दौरान रोमांच के चक्कर में छात्र अक्सर बाइक स्टंट या अन्य खतरनाक करतब करते हैं, जिससे उनके जीवन पर खतरा बन जाता है। इन हरकतों को रोकने के लिए आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि ऐसे किसी भी जोखिम भरे कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी। किशोरावस्था के इस रोमांच को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार करने को कहा गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बच्चों को सुरक्षित रखा जा सके।
शिक्षकों की निगरानी में होगी गरिमामय विदाई
आयोग की नई अनुशंसा के अनुसार, स्कूल के भीतर या छात्रों द्वारा आयोजित हर समारोह अब शिक्षकों की सीधी निगरानी में होगा। विदाई समारोहों को गरिमामय तरीके से संपन्न कराने की जिम्मेदारी शिक्षकों की होगी। आयोग का मानना है कि स्कूल प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि उत्सव का माहौल बना रहे, लेकिन नियमों और अनुशासन की अनदेखी न हो। इसके लिए कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भेज दिए गए हैं।
लापरवाही बरतने पर शाला प्रमुख को नोटिस
नियमों का पालन न होने या स्कूल में किसी भी प्रकार के खतरनाक स्टंट की घटना सामने आने पर सीधे शाला प्रमुख को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति में संबंधित प्राचार्य को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। इसके साथ ही, पुलिस अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे समय-समय पर स्कूलों में जाकर बच्चों को ऐसे कार्यों के परिणामों के बारे में समझाइश दें और उन्हें जागरूक करें।
20 फरवरी तक मांगी गई कार्रवाई की रिपोर्ट
राज्य बालक अधिकार संरक्षण आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन से जवाब-तलब किया है। लोक शिक्षण संचालनालय और सभी जिला कलेक्टरों को इन निर्देशों पर अमल करने को कहा गया है। आयोग ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि इन अनुशंसाओं पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी विस्तृत लिखित जानकारी 20 फरवरी 2026 तक आयोग के कार्यालय में जमा कराई जाए।



