
CG 108 112 Emergency Vehicles Staff Shortage: छत्तीसगढ़ में आपातकालीन चिकित्सा और सुरक्षा सेवाएं खुद गंभीर संकट से जूझ रही हैं। प्रदेश की जीवनदायिनी मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस और त्वरित सहायता देने वाली डायल-112 सेवा इस समय बेहद खस्ताहाल स्थिति में हैं। विडंबना यह है कि सरकार के पास 775 नए वाहन उपलब्ध हैं, लेकिन वे यार्ड और थानों में धूल फांक रहे हैं। एक तरफ नई गाड़ियां उद्घाटन और कर्मचारियों की कमी के कारण छह महीनों से कबाड़ होने की कगार पर हैं, तो दूसरी तरफ आम जनता को पुरानी और जर्जर गाड़ियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। इन दोनों सेवाओं के संचालन की जिम्मेदारी जीवीके कंपनी के पास है, जिसकी कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
108 एंबुलेंस की नई खेप तैयार, पर चलाने के लिए ड्राइवर और स्टाफ का टोटा
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2019 में करीब 3.28 लाख लोगों ने आपातकालीन एंबुलेंस सेवा का लाभ लिया था, जो साल 2026 में बढ़कर 4.38 लाख से अधिक पहुंच गया है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जीवीके कंपनी को 375 नई एंबुलेंस सौंपी गई हैं। इनमें 300 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS), 70 एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) और 5 नवजातों के लिए विशेष नियोनेटल गाड़ियां शामिल हैं। हालांकि, अनुभवी पुराने कर्मचारियों को नौकरी से हटाए जाने और नई भर्तियां अधूरी होने के कारण ये गाड़ियां अस्पतालों और थानों के परिसरों में बिना उपयोग के खड़ी हैं। आलम यह है कि जो गिने-चुने नए कर्मचारी रखे गए हैं, उन्हें इलाकों की भौगोलिक जानकारी नहीं है, जिससे मरीजों तक पहुंचने का रिस्पॉन्स टाइम बढ़ गया है।
वीआईपी के हाथों लोकार्पण की जिद, यार्ड में कबाड़ हो रही हैं डायल-112 की गाड़ियां
डायल-112 सेवा की कहानी और भी हैरान करने वाली है। अगस्त 2023 में करीब 40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से 400 नई गाड़ियां खरीदी गई थीं। ये गाड़ियां लगभग दो साल तक अमलेश्वर बटालियन में धूप और बारिश में खड़ी रहीं, जिससे इनकी बैटरियां और टायर पूरी तरह खराब हो गए। बाद में इन्हें जिला पुलिस को सौंप दिया गया और आपातकालीन सेवा के लिए फिर से नए वाहनों की खरीद की गई। अब ये नए वाहन भी पिछले छह महीने से यार्ड में सिर्फ इसलिए खड़े हैं क्योंकि किसी रसूखदार वीआईपी (VIP) से इनका उद्घाटन कराया जाना है। नेताओं के पास समय न होने की वजह से जनता को नई गाड़ियों की सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।
5 लाख किमी चल चुकी खटारा गाड़ियां सड़कों पर, धक्का देकर करना पड़ता है चालू
सड़कों पर इस समय जो पुरानी डायल-112 गाड़ियां दौड़ रही हैं, उनमें से अधिकांश 5 लाख किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय कर चुकी हैं। जर्जर हालत के कारण ये गाड़ियां अक्सर आपातकालीन कॉल के दौरान बीच रास्ते में ही दम तोड़ देती हैं। कई बार पुलिसकर्मियों और चालकों को गाड़ी धक्का देकर चालू करनी पड़ती है। रायपुर पुलिस को मिली पुरानी गाड़ियों की तकनीकी खराबी के कारण बड़े थानों के टीआई और डीएसपी भी समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई मौकों पर तो अधिकारियों को रास्ते में दूसरे वाहनों से लिफ्ट तक लेनी पड़ी है, जिससे पुलिस की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
सिस्टम की सुस्ती से मरीजों की जान पर बन आई
आपातकालीन सेवाओं की इस बदहाली का खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। बीते 3 मई को रिंग रोड नंबर-1 पर हुए एक सड़क हादसे में सिस्टम की पोल खुल गई। दुर्घटना की सूचना मिलने पर डायल-112 की टीम तो 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गई, लेकिन गंभीर रूप से घायल युवती के लिए 108 एंबुलेंस को फोन करने के बाद भी वह 25 मिनट तक नहीं आई। अंत में पुलिसकर्मियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लहूलुहान युवती को अपने ही वाहन में लादा और अस्पताल पहुंचाया। राजधानी रायपुर का हाल यह है कि कालीबाड़ी केंद्र में 3 नई गाड़ियों पर महज 1 ड्राइवर और पंडरी में 5 गाड़ियों पर केवल 2 ड्राइवर तैनात हैं, जिससे रात के समय अधिकांश गाड़ियां बंद रहती हैं।
जिम्मेदारी से बच रहे अधिकारी, जल्द सेवा शुरू करने का पुराना राग
इस बदइंतजामी को लेकर जब जिम्मेदार अधिकारियों से सीधी बात की गई, तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। 108 आपातकालीन सेवा के जिला इंचार्ज सत्यव्रत सिंह निना ने स्टाफ की कमी की बात को टालते हुए कहा कि अभी पूरा सेटअप तैयार किया जा रहा है और कंपनी लगातार नई भर्तियां कर रही है। वहीं दूसरी ओर, डायल-112 के एएसपी गोपी चंद मेशराम ने गाड़ियों के यार्ड में खड़े होने के सवाल पर कहा कि तकनीकी कारणों से देरी हुई थी, लेकिन अब सभी गाड़ियां पूरी तरह तैयार हैं और जल्द ही इन्हें आम जनता की सेवा में सड़क पर उतार दिया जाएगा। हालांकि, अधिकारियों के इन दावों के बीच जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।



