छत्तीसगढ़ में दो घंटे के पौधारोपण पर 26 लाख का खर्च, सुरक्षा पर 4 लाख की राशि

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कैबिनेट मंत्रियों के पौधारोपण कार्यक्रम का कुल खर्च 26 लाख रुपए सामने आया है। इसमें 22 लाख 25 हजार 983 रुपए पौधे लगाने पर और 4 लाख रुपए उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च किए गए। यह पूरा खर्च वन विभाग के खाते में दर्ज हुआ, जिसके बाद आयोजन की लागत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सीएम और मंत्रियों ने लगाया पौधा

11 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपनी कैबिनेट के साथ नवागांव स्थित बायोडायवर्सिटी पार्क पहुंचे थे। वन महोत्सव के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा मौजूद थे। इनके अलावा केदार कश्यप, रामविचार नेताम, टंकराम वर्मा, ओपी चौधरी, लक्ष्मी राजवाड़े, दयालदास बघेल, लखनलाल देवांगन और श्याम बिहारी जायसवाल ने भी पौधे रोपे।

गड्ढों से लेकर सुरक्षा तक का बड़ा खर्च

कार्यक्रम के लिए पौधारोपण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर भारी खर्च किया गया। करीब डेढ़ लाख रुपए गड्ढे खुदवाने में लगाए गए। चार लाख रुपए पौधों की सुरक्षा पर खर्च हुए। वन विभाग ने रिपोर्ट में बताया कि केवल 5 प्रतिशत पौधे खराब हुए हैं, बाकी सभी जीवित हैं। रुद्राक्ष, पीपल और अमलतास जैसे पौधे लगाए गए थे।

भव्य आयोजन के लिए अलग बजट

सीएम की मौजूदगी के कारण कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित किया गया। इसके लिए टेंट, मंच, वीआईपी रिफ्रेशमेंट और बस्तर कला की सजावट पर भी खर्च हुआ। टेंडर का काम एडविक वेंचर्स और अमित एंटरप्रायजेज को दिया गया था। कार्यक्रम की तैयारी और खर्च को देखकर सरकार के खर्च प्रबंधन पर चर्चा तेज हो गई है।

आयोजन में हुए खर्च का चौंकाने वाला विवरण

इस एक दिन के पौधारोपण आयोजन में पैसा कैसे खर्च हुआ, इसका ब्योरा भी चौंकाने वाला है।

  • टेंट: 3 लाख 18 हजार 600 रुपए
  • मंच: 3 लाख 24 हजार 820 रुपए
  • स्नैक्स के लिए टेंट: 74 हजार रुपए
  • वीआईपी रिफ्रेशमेंट: 1 लाख रुपए
  • पेंट और बस्तर आर्ट (सजावट): 2 लाख 71 हजार रुपए
  • स्लोगन (बैनर/पोस्टर): 1 लाख रुपए
  • जीरो गिट्टी (सड़क के लिए): 76 हजार रुपए
  • गड्ढा खुदाई (1.6 लाख):1 लाख 60 हजार 749 रुपए
  • सुरक्षा (लगभग 4 लाख):3 लाख 74 हजार रुपए
  • पौधे:1 लाख 68 हजार रुपए

पौधों की स्थिति पर भी उठे सवाल

पौधों पर सुरक्षा खर्च के बावजूद बाद में कुछ पौधों के खराब होने की सूचना मिली है। इससे पौधों की देखरेख को लेकर भी सवाल उठे हैं। विभाग का दावा है कि अधिकतर पौधे सुरक्षित हैं, लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट अलग तस्वीर दिखा रही है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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