9 जुलाई को देशव्यापी हड़ताल: श्रम संहिता की वापसी सहित 23 मांगों को लेकर सड़कों पर उतरेंगे 20 करोड़ मजदूर-किसान, 8 को निकाला जाएगा मशाल जुलूस और बाइक रैली

9 जुलाई 2025 को देशभर में 20 करोड़ से अधिक मजदूर, किसान और कर्मचारी एक दिन की हड़ताल पर जाएंगे। यह हड़ताल 23 सूत्रीय मांगों, विशेषकर चार श्रम संहिताओं (लैबर कोड) को रद्द करने की मांग पर केंद्रित है। छत्तीसगढ़ में यह गतिविधि संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र की अगुवाई में की जा रही है।

8 जुलाई को मशाल जुलूस, बाइक रैली से होगा अभियान की शुरुआत

हड़ताल का प्रभाव बढ़ाने के लिए 8 जुलाई को पूरे प्रदेश में मशाल जुलूस कैंडल मार्च और बाइक रैली का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य आम जनता और मजदूर वर्ग को जागरूक करना और 9 जुलाई की हड़ताल में शामिल होने के लिए प्रेरित करना है।

क्यों उठी यह मांग—नए कोड में क्या समस्या है?

र्मराज महापात्र ने बताया कि पिछले साल सरकार ने 29 पुराने श्रम कानून हटाकर चार नए कोड लागू किए, जिनमें यूनियन बनाने पर पाबंदी, ठेकेदारी और संविदाकरण को बढ़ावा, कार्य घंटे 8 से बढ़ाकर 12 होने तथा महिलाओं की रात में शिफ्ट की अनुमति जैसी जटिलताएं शामिल हैं। इससे मजदूर वर्ग के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और रोजगार की अस्थिरता बढ़ रही है।

ट्रेड यूनियनों की 23 प्रमुख मांगें – मजदूरों के हक की आवाज

  • श्रम विरोधी श्रम संहिताएं (लेबर कोड) को तत्काल रद्द किया जाए।
  • सभी श्रमिकों को ₹26,000 की न्यूनतम मासिक मजदूरी दी जाए और हर 5 वर्ष में इसका पुनरीक्षण किया जाए।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण और विनिवेश की नीतियां तुरंत रोकी जाएं।
  • ठेकाकरण, संविदाकरण और आउटसोर्सिंग की प्रथा को बंद किया जाए।
  • रिक्त पदों की भर्ती शीघ्र की जाए और बेरोजगारों को भत्ता दिया जाए।
  • भारतीय श्रम सम्मेलन (Indian Labour Conference) का तुरंत आयोजन हो।
  • पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू किया जाए। EPS में ₹9,000 न्यूनतम पेंशन और योजना से बाहर लोगों को ₹6,000 मासिक पेंशन मिले।
  • रेलवे, परिवहन, कोयला, रक्षा, बैंक, बीमा, बिजली, डाक जैसे सार्वजनिक क्षेत्रों का निजीकरण रोका जाए।
  • राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP) को समाप्त किया जाए और बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश तथा बीमा संशोधन कानून वापस लिया जाए।
  • ठेका मजदूरों सहित सभी को समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए।
  • 8 घंटे कार्यदिवस के नियम का कड़ाई से पालन हो।
  • आंगनबाड़ी, मितानिन, मिड डे मील, गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स को श्रमिक का दर्जा देकर सामाजिक सुरक्षा मिले।
  • मनरेगा में 200 दिन रोजगार और उचित मजदूरी सुनिश्चित हो।
  • शिक्षा का व्यवसायीकरण और निजीकरण बंद हो।
  • शहरी गरीबों को भी मनरेगा का लाभ दिया जाए।
  • किसानों को C2 फॉर्मूला के आधार पर लागत में 50% जोड़कर MSP की कानूनी गारंटी दी जाए।
  • कृषि उपज की सुनिश्चित खरीद और आपदा के समय विशेष राहत कोष बनाया जाए।
  • प्रवासी मजदूरों के लिए 1979 का कानून फिर से लागू किया जाए।
  • योजना कर्मियों के लिए श्रम सम्मेलन की सिफारिशें लागू हों और ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित हो।
  • ई.पी.एफ. अंशदान फिर से 12% किया जाए (वर्तमान में 10%) जिससे श्रमिकों को आर्थिक नुकसान न हो।
  • सभी असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य हो और उन्हें योजनाओं का लाभ मिले।
  • स्वास्थ्य व सुरक्षा कानूनों को मजबूत किया जाए और कार्यस्थल पर हादसों में श्रमिकों को पूरा मुआवजा मिले।
  • श्रमिकों पर लगाए गए फर्जी केस और आपराधिक धाराएं हटाई जाएं। साथ ही, संगठन, हड़ताल, प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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