
बिलासपुर: Dial 112 Vehicle Scam: छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण आपातकालीन सेवा डायल 112 की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने के बाद बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य में वर्षों से खड़ी जर्जर गाड़ियों और दो साल से उपयोग में न लाई गई नई गाड़ियों की स्थिति को लेकर कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा प्रस्तुत जवाब को नाकाफी बताते हुए गहरी नाराजगी जाहिर की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की खंडपीठ ने डीजीपी से व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ विस्तृत और स्पष्ट जवाब तलब किया है।
मीडिया रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई जनहित याचिका
Dial 112 Vehicle Scam: मामला मीडिया रिपोर्ट्स से संज्ञान में आया था, जिसमें बताया गया था कि राज्य सरकार द्वारा खरीदे गए नए डायल 112 वाहन बीते दो वर्षों से बिना उपयोग के खड़े-खड़े खराब हो रहे हैं। वहीं, पुराने वाहनों की देखरेख न होने से इमरजेंसी सेवा की कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे जनता को समय पर सहायता नहीं मिल पा रही है। इसी रिपोर्ट को संज्ञान में लेकर हाईकोर्ट ने इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज किया।
हाईकोर्ट ने उठाए तीखे सवाल, जवाब बताया अस्पष्ट
सुनवाई के दौरान डीजीपी की ओर से प्रस्तुत शपथ पत्र में केवल इतना बताया गया कि डायल 112 की जिम्मेदारी सी-डैक (C-DAC) को सौंपी गई है और वाहनों के तकनीकी डिजाइन और संचालन की प्रक्रिया गृह विभाग की अनुमति से हो रही है। कोर्ट ने इस जवाब को अधूरा और अस्पष्ट मानते हुए असंतोष जताया।
बेंच ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए:
- वितरण की देरी: डीजीपी ने बताया कि 374 वाहन खरीदे गए, जिनमें से केवल 306 वाहनों का ही वितरण हुआ है और शेष “जल्द” किए जाएंगे। कोर्ट ने इस अनिश्चित बयान पर नाराजगी जताई।
- वाहनों की स्थिति: कोर्ट ने सवाल किया कि क्या सभी जिलों तक वाहन पहुँच गए हैं, और पहुँच भी गए हैं तो क्या वे चालू हालत में हैं या अभी भी यूँ ही खड़े हैं?
- आर्थिक हानि: डीजीपी के इस दावे पर कि किसी वाहन को कोई नुकसान नहीं हुआ और कोई आर्थिक हानि नहीं हुई, कोर्ट ने ठोस साक्ष्यों के अभाव में इसे अधूरा करार दिया। कोर्ट ने कहा कि दो साल से खड़े वाहनों के रखरखाव और उपयोग की योजना पर विस्तृत रिपोर्ट अनिवार्य है।
अब 24 नवंबर तक देना होगा व्यक्तिगत शपथ पत्र
हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई यानी 24 नवंबर 2025 के पहले वे व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करें। इस शपथ पत्र में स्पष्ट रूप से बताना होगा कि कितने वाहन ऑपरेशनल हैं, उनकी वर्तमान हालत क्या है, और जनता को आपातकालीन सेवा का लाभ कब और कैसे मिलना शुरू होगा। कोर्ट का सख्त रुख यह दर्शाता है कि “जनहित से जुड़े इस मुद्दे में जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।”



