
ढाका/नई दिल्ली: पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। नरसिंदी जिले में सोमवार रात अज्ञात हमलावरों ने 40 वर्षीय हिंदू दुकानदार शरत चक्रवर्ती मणि की धारदार हथियारों से गला रेतकर हत्या कर दी। शरत पलाश उपजिला के चारसिंदूर बाजार में अपनी किराने की दुकान पर बैठे थे, तभी उन पर हमला हुआ। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि शरत ने 19 दिसंबर को ही फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर देश के हालातों पर चिंता जताई थी और अपने इलाके को ‘मौत की घाटी’ करार दिया था। बीते 18 दिनों के भीतर यह छठे हिंदू व्यक्ति की हत्या है।
जेसोर में पत्रकार और फैक्ट्री मालिक की हत्या: बाइक सवार बदमाशों ने नजदीक से सिर में मारी गोली
नरसिंदी की घटना से महज कुछ घंटे पहले 5 जनवरी को जेसोर जिले में भी एक हिंदू व्यक्ति को निशाना बनाया गया। मोनिरामपुर इलाके में आइस फैक्ट्री के मालिक और स्थानीय अखबार ‘दैनिक बीडी खबर’ के कार्यकारी संपादक राणा प्रताप बैरागी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। चश्मदीदों के मुताबिक, बाइक पर सवार तीन हमलावर उन्हें फैक्ट्री से बाहर एक गली में ले गए और उनके सिर में काफी नजदीक से गोली मार दी। पुलिस को मौके से सात खाली कारतूस मिले हैं। सार्वजनिक रूप से हुई इस हत्या ने इलाके के अल्पसंख्यक समुदाय में भारी दहशत पैदा कर दी है।
हैवानियत की हदें पार: झेनाइदह में हिंदू विधवा से गैंगरेप, बाल काटे और पेड़ से बांधकर पीटा
बांग्लादेश के झेनाइदह जिले से भी मानवता को शर्मसार करने वाली खबर आई है। 3 जनवरी को कालीगंज इलाके में एक 44 वर्षीय हिंदू विधवा महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। आरोपियों ने न केवल महिला के साथ हैवानियत की, बल्कि उसके बाल काट दिए और उसे पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा। इस दौरान आरोपियों ने पूरी घटना का वीडियो भी बनाया। पीड़िता ने चार लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने हसन नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी शाहीन अब भी फरार है।

जमीन विवाद और अवैध वसूली का मामला: रिश्तेदारों को बंधक बनाकर घर में घुसे थे आरोपी
स्थानीय लोगों के अनुसार, पीड़िता ने करीब दो साल पहले आरोपी शाहीन के भाई से जमीन खरीदी थी। जमीन खरीदने के बाद से ही शाहीन उसे लगातार परेशान कर रहा था और पैसों की मांग कर रहा था। शनिवार शाम जब महिला के दो रिश्तेदार उससे मिलने आए, तब आरोपी जबरन घर में घुस गए। उन्होंने रिश्तेदारों को एक कमरे में बंद कर दिया और महिला के साथ दूसरे कमरे में दुष्कर्म किया। बाद में अपनी करतूत छुपाने के लिए आरोपियों ने पीड़िता और उसके रिश्तेदारों पर ही अश्लील गतिविधियों का झूठा आरोप लगाया और उन्हें घर के बाहर पेड़ से बांध दिया।
अल्पसंख्यकों में पलायन का डर: 18 दिनों में छह हत्याओं से सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
बांग्लादेश में पिछले ढाई हफ्तों के भीतर एक के बाद एक छह हिंदुओं की हत्या ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हिंदुओं के घरों, दुकानों और मंदिरों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। नरसिंदी और जेसोर की घटनाओं के बाद स्थानीय हिंदू समुदायों में डर का माहौल है। लोग घरों से निकलने में भी कतरा रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन इन हिंसक घटनाओं को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रही आवाज: मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे इन हमलों की गूंज अब विदेशों में भी सुनाई दे रही है। कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने बांग्लादेश सरकार से हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। भारत समेत कई देशों के नागरिक समाज ने इन हत्याओं और गैंगरेप की घटनाओं की कड़ी निंदा की है। मांग की जा रही है कि आरोपियों को जल्द से जल्द फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सजा दी जाए ताकि अल्पसंख्यकों का विश्वास बहाल हो सके। हालांकि, वर्तमान स्थिति को देखते हुए बांग्लादेश में हिंदू परिवारों का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।



