
भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) प्रबंधन अब अपने प्रमुख प्रतिष्ठानों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहा है। प्रदेश के सबसे बड़े और लोकप्रिय मैत्री बाग (Zoo) को अब सेल प्रबंधन निजी संस्थाओं को ठेके पर देने के लिए टेंडर जारी किया है। मैत्री बाग के अलावा, बीएसपी द्वारा संचालित 3 स्कूलों को भी निजीकरण के तहत संचालित करने के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। इस कदम से राजनीतिक और श्रमिक संगठनों में विरोध का दौर शुरू हो गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं का भी निजीकरण निशाने पर
बीएसपी प्रबंधन पर आरोप लग रहे हैं कि मैत्री बाग और स्कूलों के बाद अब एक जमाने में प्रदेश के सबसे बड़े माने जाने वाले सेक्टर 9 अस्पताल के भी निजीकरण की तैयारी की जा रही है। यह अस्पताल न केवल बीएसपी कर्मियों के लिए, बल्कि आम जनता के लिए भी स्वास्थ्य सेवा का प्रमुख केंद्र रहा है। सेल प्रबंधन ने अखबारों में ‘रूचि की अभिव्यक्ति’ (Expression of Interest) के तहत विज्ञापन जारी किया है, ताकि योग्य संगठन या संस्था इन परिसरों का संचालन नियमों और शर्तों के तहत कर सके।
5 दशक पुरानी पहचान है मैत्री बाग, सफेद बाघों की नर्सरी के नाम से है मशहूर
लगभग 140 एकड़ में फैला मैत्री बाग भिलाई की एक ऐतिहासिक पहचान है, जिसकी स्थापना 1972 में की गई थी। इसके भीतर मौजूद चिड़ियाघर अपनी खास पहचान रखता है और इसे सफेद बाघों की नर्सरी के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ से अब तक इंदौर, गुजरात, बंगाल समेत देश के कई राज्यों में सफेद शेर भेजे जा चुके हैं। कर्मचारियों के मनोरंजन के लिए शुरू हुए इस बाग में अब टिकट शुल्क 20 रुपये प्रति व्यक्ति हो गया है।
कांग्रेस विधायक ने किया कड़ा विरोध
मैत्री बाग के निजीकरण की खबर सामने आते ही भिलाई के कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण का आरोप लगाते हुए कहा कि सेल प्रबंधन धीरे-धीरे पूरे प्लांट का निजीकरण कर चुका है और अब शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ-साथ इस एकमात्र गार्डन को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम छत्तीसगढ़ महतारी भिलाई को ‘तिल-तिल कर बेचने’ जैसा है और कांग्रेस पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी।
आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका से जनता परेशान
बीएसपी यूनियन सीटू के उपाध्यक्ष डीवीएस रेड्डी समेत आम जनता ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि निजी हाथों में गार्डन का संचालन जाने के बाद वहाँ आने वाले लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ जाएगा और टिकट शुल्क में वृद्धि होगी। इसके अलावा, लोगों का मानना है कि जिस अच्छी सोच के साथ बीएसपी के संस्थापकों ने इस गार्डन का निर्माण किया था, निजीकरण के बाद यह अपनी मध्य भारत की विशिष्ट पहचान खो देगा।



