
रायपुर: शिक्षा का अधिकार कानून RTE (Right to Education) के तहत निजी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने एक कड़ा आदेश जारी किया है। DPI ने प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया है कि जो बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं (ड्रापआउट), उन्हें नोडल प्राचार्य की सहमति और अनुशंसा के बिना निजी स्कूल स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC) जारी नहीं कर सकते हैं। यह नियम बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा विभाग करेगा ड्रापआउट बच्चों की काउंसलिंग
यह आदेश ड्रापआउट होने वाले बच्चों के भविष्य की चिंता और उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से जारी किया गया है। DPI ने निर्देश दिया है कि TC के लिए आवेदन आने पर, शिक्षा विभाग के अधिकारी बच्चे और उनके माता-पिता से मिलेंगे और उनकी काउंसलिंग करेंगे। इसका मकसद यह जानना है कि किन कारणों से बच्चा पढ़ाई छोड़ रहा है और उसे दोबारा अध्ययन-अध्यापन में वापस आने के लिए प्रेरित करना है। आमतौर पर, टीसी जारी होने के बाद ऐसे बच्चों से संपर्क टूट जाता था।
TC जारी करने से पहले नोडल प्राचार्य की सहमति अनिवार्य
DPI द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में टीसी जारी करने से पहले कुछ कड़ी शर्तें अनिवार्य की गई हैं। RTE में पंजीकृत निजी विद्यालयों को साफ निर्देश है कि वे नोडल प्राचार्य की सहमति पत्र के बिना किसी भी ड्रापआउट बच्चे को टीसी प्रदान न करें। जब पालक टीसी के लिए नोडल प्राचार्य के पास आवेदन करेंगे, तो प्राचार्य बच्चे और पालक की काउंसलिंग करेंगे। यदि पालक द्वारा दिया गया कारण जायज प्रतीत होता है, तभी नोडल प्राचार्य उस कारण का उल्लेख करते हुए टीसी जारी करने की अनुमति देंगे।
TC के बाद पोर्टल से ड्रापआउट करना होगा जरूरी
DPI ने यह भी स्पष्ट किया है कि नोडल प्राचार्य द्वारा टीसी जारी करने की अनुमति दिए जाने और निजी विद्यालय द्वारा स्थानांतरण प्रमाण पत्र जारी करने के बाद, नोडल प्राचार्य को अपने लॉगिन से उस बच्चे को शाला से ड्रापआउट करना अनिवार्य होगा। पोर्टल से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हर साल लगभग 10 प्रतिशत बच्चे आठवीं कक्षा पूरी किए बिना ही स्कूल छोड़ देते हैं, इसलिए इस प्रक्रिया को पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य बनाना जरूरी है।
नियम उल्लंघन पर निजी स्कूलों पर होगी कार्रवाई
DPI ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि काउंसलिंग के दौरान यह बात सामने आती है कि निजी विद्यालय में बच्चे के साथ किसी प्रकार का भेदभाव या प्रताड़ना हुई है, तो नोडल प्राचार्य तत्काल इसकी सूचना जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को देंगे और जांच कराएंगे। यदि सूचना सही पाई जाती है, तो संबंधित निजी शाला पर नियम सम्मत कार्यवाही प्रस्तावित की जाएगी। इस आदेश का उद्देश्य RTE के तहत नामांकित बच्चों की शिक्षा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
देखिये आदेश-






