
बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में शाला प्रवेशोत्सव के दौरान एक मामूली प्रोटोकॉल चूक ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। कसडोल विकासखंड के एक शासकीय स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक संदीप साहू उस समय भड़क उठे जब शिक्षक ने स्वागत क्रम में सांसद प्रतिनिधि संतोष वैष्णव का नाम पहले ले लिया। विधायक ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताते हुए कार्यक्रम को बीच में ही रोक दिया और मंच पर ही शिक्षक को फटकार लगा दी।
विधायक ने जताई नाराजगी, कहा- “अगर प्रोटोकॉल नहीं पता तो बुलाया मत करो”
कार्यक्रम के दौरान बच्चों और अभिभावकों की उपस्थिति में जैसे ही शिक्षक ने स्वागत क्रम की घोषणा शुरू की, उन्होंने सबसे पहले सांसद प्रतिनिधि का नाम लिया। यह बात विधायक साहू को नागवार गुज़री। उन्होंने तुरंत कार्यक्रम रुकवा दिया और शिक्षक से तीखे लहजे में कहा, “आप टीचर हैं और इतना भी नहीं जानते कि पदक्रम में कौन वरिष्ठ होता है। अगर प्रोटोकॉल नहीं मालूम, तो बुलाना ही बंद कर दो।”
विधायक ने आगे कहा कि अब से मेरे प्रतिनिधि ही इस तरह के कार्यक्रमों में शामिल होंगे और वही प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करेंगे।
स्कूल प्रबंधन पर भी उठाए सवाल
विधायक संदीप साहू ने कार्यक्रम में हुई इस चूक को स्कूल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही बताया। उन्होंने कहा कि शाला प्रबंधन समिति को आमंत्रण पत्र भेजने और कार्यक्रम की जानकारी देने में भी गड़बड़ियां रहीं। कुछ जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की सूचना ही नहीं दी गई थी, जबकि उनके नाम आमंत्रण पत्र में थे।
कार्यक्रम में देरी और अव्यवस्था बनी विवाद का कारण
कार्यक्रम का समय सुबह 11 बजे तय था, लेकिन इसमें काफी देरी हुई। इसके साथ ही स्कूल प्रशासन द्वारा अतिथियों को लेकर की गई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं रही। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जब प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी अरविंद धुरु से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कुछ भी कहने से परहेज़ किया।
पामगढ़ विधायक भी रहे मौजूद, वीडियो हुआ वायरल
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पामगढ़ विधायक शेषराज हरिवंश भी मौके पर मौजूद थे। नाराज विधायक संदीप साहू ने इसे शिक्षा विभाग की लापरवाही करार देते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे यह मामला सुर्खियों में आ गया है।
शाला प्रवेशोत्सव जैसा शैक्षणिक और प्रेरणादायी कार्यक्रम एक राजनीतिक टकराव का कारण बन गया, जहां सम्मान की प्राथमिकता ने शिक्षा से जुड़े उद्देश्य को पीछे छोड़ दिया। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग भविष्य में ऐसी गलतियों से कैसे निपटता है।
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