
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के राजपुर धान खरीदी केंद्र में टोकन की समस्या को लेकर माहौल गरमा गया है। मंगलवार सुबह करीब साढ़े दस बजे नाराज किसानों ने अंबिकापुर-रामानुजगंज राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम कर दिया। यह पिछले एक महीने में किसानों का तीसरा बड़ा आंदोलन है। प्रदर्शन की वजह से हाईवे पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। किसानों का कहना है कि प्रशासन के बार-बार आश्वासन देने के बावजूद उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
वादे के बाद भी नहीं कटे टोकन
किसानों ने बताया कि 12 जनवरी को तहसीलदार कावेरी मुखर्जी ने खरीदी की लिमिट बढ़ाने का भरोसा दिलाया था। अधिकारियों के आश्वासन पर किसानों ने खरीदी केंद्र के रजिस्टर में अपने नाम दर्ज कराए थे। हालांकि लिमिट बढ़ने के बाद भी रजिस्टर में दर्ज किसानों के क्रमवार टोकन नहीं काटे गए। किसानों का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए उन्हें दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और कड़ाके की ठंड में सड़कों पर उतरने को मजबूर होना पड़ रहा है।
पुलिस और प्रशासन ने दिया लिखित भरोसा
चक्काजाम की खबर मिलते ही तहसीलदार कावेरी मुखर्जी और थाना प्रभारी भारद्वाज सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों को बताया कि राजपुर केंद्र की लिमिट को और बढ़ाने के लिए शासन को नया प्रस्ताव भेजा गया है। स्थिति तब संभली जब थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया कि रजिस्टर के अनुसार ही टोकन काटे जाएंगे और पारदर्शिता के लिए पुलिस का एक प्रतिनिधि केंद्र पर मौजूद रहेगा। इस भरोसे के बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त किया और हाईवे पर आवाजाही शुरू हो सकी।
कर्ज माफी और धान बिक्री की मांग
आंदोलन के दौरान किसानों ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए दो टूक कहा कि सरकार को उनकी सुध लेनी चाहिए। किसानों का कहना था कि यदि सरकार उनका धान नहीं खरीद सकती तो उनका कृषि कर्ज माफ कर दिया जाए। बता दें कि इससे पहले 19 दिसंबर को कांग्रेस नेताओं के साथ और 5 जनवरी को एसडीएम दफ्तर का घेराव कर किसान अपनी आवाज उठा चुके हैं। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी वादाखिलाफी हुई तो वे और भी उग्र प्रदर्शन करेंगे।
कांग्रेस का समर्थन और राजनीतिक हलचल
किसानों के इस प्रदर्शन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष नीरज तिवारी ने धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों की मांगों को जायज ठहराया। उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात कर जल्द से जल्द टोकन जारी करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे किसानों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। इस आंदोलन ने एक बार फिर धान खरीदी की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिससे जिला प्रशासन और सरकार दोनों पर दबाव बढ़ गया है।



