Sushasan Tihar Brijmohan Agarwal Viral Video: सुशासन तिहार में नायब तहसीलदार पर भड़के सांसद बृजमोहन अग्रवाल: पूछा- कितना पैसा लेते हो? जनता ने बजाईं तालियां, 3 दिन में तलब की रिपोर्ट

Arang Samoda Sushasan Tihar Brijmohan Agarwal Viral Video: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे आरंग इलाके में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में उस वक्त भारी हंगामा हो गया, जब रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल मंच पर ही एक प्रशासनिक अधिकारी पर बरस पड़े। आरंग विधानसभा क्षेत्र के नगर पंचायत समोदा में ‘सुशासन तिहार’ शिविर का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनता की दबी हुई समस्याओं और प्रशासनिक लापरवाही की शिकायतों का मौके पर ही निपटारा करना था। मंच पर जैसे ही राजस्व विभाग की मनमानी का मुद्दा उठा, सांसद ने समोदा में पदस्थ नायब तहसीलदार गजानंद सिदार को सामने बुलाकर तीखे सवाल दाग दिए। इस वाकये का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

तहसील दफ्तर की मनमानी से परेशान थे ग्रामीण, भ्रष्टाचार और लेटलतीफी के लगे गंभीर आरोप

Arang Samoda Sushasan Tihar: समोदा के हाई स्कूल मैदान में आयोजित इस शिविर में आस-पास के दर्जनों गांवों से सैकड़ों की संख्या में किसान और ग्रामीण अपनी फरियाद लेकर पहुंचे थे। शिविर में सबसे ज्यादा आक्रोश स्थानीय तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर देखा गया। ग्रामीणों ने सांसद के सामने सीधे तौर पर निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए:

  • लंबित राजस्व मामले: नामांतरण, जमीन का सीमांकन और आपसी बंटवारे जैसे जरूरी काम महीनों से दफ्तर में धूल खा रहे हैं।
  • फाइलों की लेटलतीफी: तय समय-सीमा बीत जाने के बाद भी आवेदकों को केवल अगली तारीख देकर भगा दिया जाता है।
  • लेन-देन की मांग: ग्रामीणों का आरोप है कि बिना सुविधा शुल्क या दलालों के माध्यम से पैसे दिए बिना कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती।
  • अधिकारियों का रवैया: छोटे-छोटे कामों के लिए दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों के साथ मैदानी अमले का व्यवहार ठीक नहीं रहता।

‘सांसद जी को कितना पैसा दिए हो?’… भरे मंच से बृजमोहन अग्रवाल ने लगाई कड़ी फटकार

Brijmohan Agarwal Nayab Tehsildar Viral Video: जनता के गुस्से और दर्जनों लंबित आवेदनों को देखकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल का पारा चढ़ गया। उन्होंने तुरंत माइक संभालते हुए समोदा के नायब तहसीलदार गजानंद सिदार को मंच पर तलब किया। अधिकारी के सामने आते ही सांसद ने उनसे तीखे लहजे में सीधे सवाल पूछे, जिसे सुनकर पंडाल में मौजूद जनता ने तालियां बजानी शुरू कर दीं। बातचीत के मुख्य अंश इस प्रकार रहे:

  • सांसद: यहां के नायब तहसीलदार कौन हैं जी? आपका अभिनंदन करें कि क्या करें बताओ? सबसे ज्यादा शिकायतें आपकी ही आ रही हैं।
  • सांसद: कितना पैसा लेते हो जो लोगों को बोलते हो? क्या बोलते हो लोगों से? इसकी सबसे ज्यादा शिकायत है। कितना पैसा दिए हो सांसद जी को… कितना पैसा दिए हो?
  • अधिकारी: (मंच पर असहज होते हुए हाथ के इशारे से पैसे लेने की बात से साफ इनकार करते हैं)
  • सांसद: ये मेरे पास आवेदनों का पुलिंदा है। इनका निराकरण अब तक क्यों नहीं हुआ? मुझे इसका जवाब चाहिए।

आला अधिकारियों को दिए जांच के निर्देश, तीन दिनों के भीतर मांगी पेंडिंग केसों की रिपोर्ट

मामले को बिगड़ता देख सांसद ने कार्यक्रम में मौजूद जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत आड़े हाथों लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अतिरिक्त कलेक्टर कीर्तिमान सिंह राठौर और एसडीएम अभिलाषा पैकरा को मंच से ही कड़े प्रशासनिक निर्देश जारी किए:

  • केसों का रिव्यू: समोदा तहसील कार्यालय में जितने भी नामांतरण और सीमांकन के केस पेंडिंग हैं, उनकी फाइलें तुरंत खोली जाएं।
  • तीन दिन की समय-सीमा: नायब तहसीलदार के कामकाज और लंबित मामलों की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर तैयार कर सांसद कार्यालय को भेजी जाए।
  • कड़ी कार्रवाई की चेतावनी: सांसद ने दोटूक कहा कि अगर जांच में भ्रष्टाचार या जानबूझकर काम रोकने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारी को निलंबित करने की सिफारिश की जाएगी।
  • अंतिम चेतावनी: अधिकारी से साफ कहा गया कि भविष्य में जनता को परेशान करने की एक भी शिकायत दोबारा उन तक नहीं पहुंचनी चाहिए।

जनता ने खुलकर किया सांसद की नाराजगी का समर्थन, जनप्रतिनिधि के तेवरों की चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सुशासन तिहार का माहौल पूरी तरह बदल गया। शिविर में आए आम लोगों ने सांसद द्वारा अधिकारी को दी गई इस फटकार का पुरजोर समर्थन किया। ग्रामीणों का कहना था कि वे महीनों से इस दफ्तर के चक्कर काट-काटकर थक चुके थे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। यह पहली बार है जब किसी बड़े जनप्रतिनिधि ने जनता की तकलीफ को समझते हुए भरे मंच से जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की है। आरंग और समोदा के ग्रामीण इलाकों में अब इस पूरी कार्रवाई और सांसद के कड़े तेवरों की जमकर चर्चा हो रही है।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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