
CG Sarpanch Mass Resignation: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के कांकेर जिले से एक बहुत बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। जिले के अंतागढ़ ब्लॉक में ग्रामीण विकास के काम पूरी तरह ठप होने और पंचायतों को बुनियादी फंड न मिलने से नाराज होकर भारी संख्या में सरपंचों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। जमीनी स्तर पर जनता की समस्याओं का समाधान न कर पाने से आहत इन जनप्रतिनिधियों के इस अप्रत्याशित कदम ने राज्य के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति भी पूरी तरह गर्मा गई है, क्योंकि एक दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए तीखे सवाल दागे थे।
18 मई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे ग्राम प्रमुख, मांगें पूरी न होने पर एसडीएम को सौंपा इस्तीफा
अंतिम निर्णय लेने से पहले ये सभी जनप्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे। अंतागढ़ ब्लॉक के सरपंच संघ के बैनर तले तमाम ग्राम प्रमुख आगामी 18 मई 2026 से अंतागढ़ शहर के प्रमुख गोल्डन चौक पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराने के बाद भी जब कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो नाराज सरपंचों ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के दफ्तर पहुंचकर अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। कांकेर जिले के अतिरिक्त कलेक्टर ने भी प्रशासनिक स्तर पर 27 सरपंचों के इस्तीफे मिलने की आधिकारिक पुष्टि की है।
सरपंच संघ का बड़ा दावा, कहा ब्लॉक की सभी 56 पंचायतों के प्रमुखों और जिला सदस्य ने छोड़ा पद
एक तरफ जहां जिला प्रशासन केवल 27 ग्राम पंचायतों के सरपंचों के इस्तीफे की बात स्वीकार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय पंचायत सदस्य संघ ने इससे कहीं बड़ा दावा किया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि अंतागढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली सभी 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने एकजुट होकर इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है और सभी ने एक साथ अपने पदों से त्यागपत्र दिया है। सरपंचों के इस सामूहिक इस्तीफे को समर्थन देते हुए कांकेर जिला पंचायत के सदस्य गुप्तेश उसेंडी ने भी अपना पद छोड़ दिया है, जिससे यह पूरा विवाद और बड़ा हो गया है।
एक साल से नहीं मिली एक भी नई परियोजना को मंजूरी, बिना बजट जनता से किए वादे पूरे करना नामुमकिन
इस्तीफा देने वाले ग्राम प्रमुखों और जिला पंचायत सदस्य ने शासन-प्रशासन पर उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पिछले एक साल के भीतर उनकी पंचायतों में सड़क, शुद्ध पेयजल, नाली निर्माण और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी एक भी नई विकास परियोजना को सरकारी मंजूरी नहीं दी गई है। जिला पंचायत सदस्य गुप्तेश उसेंडी ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि गांवों में विकास पूरी तरह ठप है। जब ग्रामीण हमसे बुनियादी सुविधाओं की मांग करते हैं, तो बजट के अभाव में हम उन्हें कोई जवाब नहीं दे पाते। ऐसी स्थिति में पंचायतों का संचालन करना हमारे लिए पूरी तरह असंभव हो गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा, पंचायतों की वित्तीय नाकेबंदी पर उठाए गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ की मुख्यधारा की राजनीति में भी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अंतागढ़ के सरपंचों के आंदोलन का समर्थन करते हुए राज्य सरकार की प्रशासनिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास की धुरी मानी जाने वाली पंचायती राज व्यवस्था को बजट न देना बेहद चिंताजनक है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पंचायतों की वित्तीय नाकेबंदी की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का निर्माण रुक गया है। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर राज्य स्तर पर एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने में जुट गया है।



