
कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जो शायद ही कोई नेता चाहेगा। वे छत्तीसगढ़ के पहले ऐसे विधायक बन गए हैं जिन्हें अदालत ने पूरे प्रदेश में रहने से प्रतिबंधित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें शराब घोटाला मामले में अंतरिम जमानत तो दे दी है, लेकिन इसके साथ एक कड़ी शर्त जोड़ दी है। लखमा को अब छत्तीसगढ़ की सीमा से बाहर रहना होगा और वे केवल तय पेशियों के दौरान ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे।
379 दिन बाद जेल की सलाखों से बाहर
कवासी लखमा को शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य की जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार किया था। वे करीब 379 दिनों तक रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद रहे। 4 फरवरी को रिहा होने के बाद वे सीधे अपने क्षेत्र सुकमा पहुंचे, लेकिन यह राहत बहुत कम समय के लिए है। अदालती आदेश के मुताबिक उन्हें शुक्रवार रात तक छत्तीसगढ़ की सीमा छोड़नी होगी, वरना उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।
6 फरवरी की पेशी के बाद बदल जाएगा पता
लखमा को फिलहाल 6 फरवरी को होने वाली अदालती पेशी की वजह से राज्य में रुकने की अनुमति मिली है। शराब स्कैम केस की सुनवाई के लिए उन्हें कोर्ट में हाजिर होना है। इस कानूनी प्रक्रिया के तुरंत बाद उन्हें प्रदेश से बाहर निकलना होगा। सूत्रों की मानें तो शुक्रवार की रात उनके लिए छत्तीसगढ़ में आखिरी रात होगी, जिसके बाद उन्हें अपनी नई शरणस्थली की तलाश करनी होगी।
पड़ोसी राज्यों में ठिकाने की तलाश
कोंटा विधायक कवासी लखमा का अगला ठिकाना क्या होगा, इसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। लखमा के विधानसभा क्षेत्र सुकमा की सीमाएं आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा से मिलती हैं। माना जा रहा है कि वे इन्हीं तीनों में से किसी एक राज्य को अपना अस्थाई निवास बना सकते हैं ताकि अपने क्षेत्र के लोगों के संपर्क में रह सकें। राज्य से बाहर रहने की इस शर्त ने उनकी राजनीतिक सक्रियता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
बजट सत्र के न्योते ने बढ़ाई उलझन
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ कोर्ट ने उन्हें राज्य से बाहर रहने को कहा है, वहीं दूसरी तरफ विधानसभा सचिवालय ने उन्हें आगामी बजट सत्र का औपचारिक निमंत्रण भेजा है। नियमों के मुताबिक हर विधायक को सत्र में शामिल होने का अधिकार है, लेकिन लखमा के मामले में सुप्रीम कोर्ट की शर्तें सर्वोपरि होंगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए विशेष अनुमति की मांग करते हैं।
जांच एजेंसियों का कसता शिकंजा
शराब घोटाला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े आर्थिक अपराधों में से एक माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कवासी लखमा के कार्यकाल के दौरान सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाकर अवैध कमाई की गई। हालांकि लखमा इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं, लेकिन जेल में बिताए लंबे समय और अब राज्य बदर होने की शर्त ने उनकी कानूनी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
क्या बदलेंगी जमानत की शर्तें?
लखमा के वकील आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में शर्तों में ढील देने की याचिका लगा सकते हैं। विधायक होने के नाते उन्हें अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को सुनने और विधानसभा में उपस्थित होने की दलील दी जा सकती है। फिलहाल उनकी हर गतिविधि पर प्रशासन की पैनी नजर है। आने वाली सुनवाई और कोर्ट का अंतिम फैसला ही तय करेगा कि बस्तर का यह कद्दावर नेता कब तक अपने प्रदेश से दूर रहेगा।



