
छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रयोगशाला तकनीशियन के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया में एक और बड़ा कदम उठाया है। विभाग के आयुक्त ने चयन सूची के बाद अब चयनित अभ्यर्थियों के लिए पदस्थापना आदेश जारी कर दिया है। गौरतलब है कि विभाग ने कुल 260 पदों के लिए विज्ञापन निकाला था, जिसकी परीक्षा व्यापमं द्वारा आयोजित की गई थी। परीक्षा परिणाम आने और संचालनालय स्तर पर दावा-आपत्ति के निराकरण के बाद अब अंतिम रूप से चयनित उम्मीदवारों को शासकीय महाविद्यालयों में पदस्थ किया गया है।
अनुपूरक सूची के अभ्यर्थियों को मिला मौका
मुख्य चयन सूची के बाद पदस्थापना के लिए आयोजित काउंसलिंग में कई अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। जानकारी के मुताबिक, काउंसलिंग से 14 अभ्यर्थी गायब थे, जबकि 4 ने लिखित में पद त्याग दिया और 10 उम्मीदवारों ने तय समय में जॉइनिंग नहीं दी। इन खाली पड़े 28 स्थानों में से 24 पदों को अनुपूरक (सप्लीमेंट्री) सूची से भरा गया है। हालांकि, अभी भी 4 पद रिक्त रह गए हैं क्योंकि 2 अभ्यर्थी काउंसलिंग में नहीं आए और 1 भूतपूर्व सैनिक व 1 दिव्यांग श्रेणी का पात्र उम्मीदवार नहीं मिल सका।
वेतनमान और नौकरी की प्रमुख शर्तें
नवनियुक्त प्रयोगशाला तकनीशियनों को वेतन मैट्रिक्स लेवल-6 (25300-80500 रुपये) के तहत नियुक्त किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह नियुक्ति अस्थायी रूप से 3 वर्ष की परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) के लिए की गई है। इस दौरान अभ्यर्थियों को प्रशासन के नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। नियुक्ति आदेश जारी होने के एक महीने के भीतर संबंधित कॉलेज में जॉइनिंग देना अनिवार्य है। यदि कोई अभ्यर्थी निर्धारित समय में पदभार ग्रहण नहीं करता है, तो उसका नियुक्ति आदेश बिना किसी सूचना के रद्द माना जाएगा।
त्यागपत्र और अनुशासन से जुड़े कड़े नियम
शासकीय सेवा को लेकर विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। यदि कोई कर्मचारी परिवीक्षा अवधि के दौरान नौकरी छोड़ना चाहता है, तो उसे एक महीने का नोटिस देना होगा या उसके बदले एक महीने का वेतन जमा करना होगा। बिना किसी पूर्व सूचना के काम से गायब रहने पर यह मान लिया जाएगा कि संबंधित व्यक्ति ने सेवा छोड़ दी है। ऐसी स्थिति में बकाया राशि की वसूली भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह की जाएगी। इसके अलावा, परिवीक्षा अवधि के दौरान स्थानांतरण (ट्रांसफर) की पात्रता नहीं होगी।

सत्यापन में फर्जीवाड़ा पड़ा भारी, सीधे होगी जेल
नियुक्ति पूरी तरह से पुलिस वेरिफिकेशन, मेडिकल फिटनेस और प्रमाण पत्रों के सत्यापन पर टिकी है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि किसी अभ्यर्थी का जाति, निवास, दिव्यांगता या भूतपूर्व सैनिक प्रमाण पत्र फर्जी पाया जाता है, तो न केवल उसे तत्काल नौकरी से निकाल दिया जाएगा, बल्कि भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाएगा। आरक्षित वर्ग के आवेदकों के प्रमाण पत्रों की जांच उच्च स्तरीय छानबीन समिति द्वारा कराई जाएगी ताकि किसी भी तरह के फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे।

सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी नियुक्ति
आयुक्त उच्च शिक्षा संचालनालय द्वारा जारी आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह पूरी भर्ती प्रक्रिया माननीय उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) में लंबित एसएलपी (SLP) के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। इसका मतलब है कि भविष्य में कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वह इन नियुक्तियों पर लागू होगा। यह नियुक्ति छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 और आचरण नियम 1965 के तहत संचालित होगी, जिसका उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
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