
बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) में वरिष्ठ साहित्यकार मनोज रूपड़ा को अपमानित करने का मामला अब बड़ा रूप ले चुका है। राष्ट्रीय परिसंवाद के दौरान हुई इस अभद्रता का वीडियो वायरल होने के बाद चौतरफा दबाव में आए विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहली बड़ी कार्रवाई की है। हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. गौरी त्रिपाठी को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उनकी जगह विभाग के ही असिस्टेंट प्रोफेसर रमेश गोहे को विभाग की कमान सौंपी गई है। माना जा रहा है कि साहित्य जगत में बढ़ते आक्रोश को शांत करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
कुलपति और साहित्यकार के बीच तीखी बहस
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कुलपति प्रोफेसर आलोक चक्रवाल मंच से अपना भाषण दे रहे थे। भाषण के दौरान कुलपति ने सामने बैठे नागपुर के मशहूर कथाकार मनोज रूपड़ा से तंजिया लहजे में पूछा कि क्या वे बोर हो रहे हैं। इस पर रूपड़ा ने जवाब दिया कि आप विषयांतर होने के बजाय मुख्य विषय पर बात करें। यह सुनकर कुलपति आपा खो बैठे और उन्होंने भरे कार्यक्रम में साहित्यकार से कहा कि उन्हें कुलपति से बात करने का सलीका नहीं पता। उन्होंने रूपड़ा को यह कहते हुए बाहर जाने का आदेश दिया कि आपका यहां स्वागत नहीं है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल और भारी नाराजगी
इस पूरी घटना का वीडियो किसी ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से फैला। वीडियो में कुलपति का व्यवहार देखकर देशभर के साहित्यकार और बुद्धिजीवी भड़क उठे। कई लोगों ने इसे ज्ञान के मंदिर में अभिव्यक्ति की आजादी और अतिथि का अपमान करार दिया। सोशल मीडिया पर कुलपति को पद से हटाने की मांग भी उठने लगी थी। इस विवाद ने विश्वविद्यालय की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर काफी नुकसान पहुँचाया है।
विवादों और अव्यवस्थाओं का केंद्र बनी यूनिवर्सिटी
यह पहली बार नहीं है जब गुरु घासीदास विश्वविद्यालय सुर्खियों में है। पिछले कुछ समय से कैंपस में लगातार अप्रिय घटनाएं हो रही हैं। हाल ही में मेस कर्मचारियों द्वारा बीटेक के एक छात्र पर चाकू लेकर हमला करने का वीडियो भी सामने आया था। इसके अलावा एक लॉ छात्र की आत्महत्या, नमाज विवाद और छात्रों के निष्कासन जैसे मामलों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। कैंपस में बढ़ते अपराध और तनावपूर्ण माहौल से छात्र और अभिभावक दोनों डरे हुए हैं।
विभाग के नए नेतृत्व के सामने चुनौतियां
हिंदी विभाग की कमान संभालने वाले रमेश गोहे के सामने अब विभाग की बिगड़ी हुई साख को सुधारने की बड़ी चुनौती है। डॉ. गौरी त्रिपाठी को हटाए जाने के बाद अब यह देखना होगा कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन कुलपति के व्यवहार पर भी कोई स्पष्टीकरण देता है। फिलहाल इस कार्रवाई को केवल एक बचाव के तौर पर देखा जा रहा है। साहित्यकारों का एक वर्ग अब भी इस मामले में कुलपति से सार्वजनिक माफी की मांग कर रहा है ताकि भविष्य में किसी अन्य विद्वान के साथ ऐसी घटना न दोहराई जाए।



