भूख हड़ताल भी प्रशासन पर बेअसर, ग्रामीणों ने श्रमदान और चंदा जुटाकर खुद किये रपटों का मरम्मत

गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में राजापड़ाव-शोभा मार्ग पर स्थित 5 बरसाती नालों में से दो रपटों की स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि ग्रामीणों को खुद आगे आकर मरम्मत का कार्य करना पड़ा। प्रशासन की ओर से बार-बार की गई मांगों और भूख हड़ताल के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो नाराज़ ग्रामीणों ने श्रमदान और चंदा जुटाकर मरम्मत का काम शुरू किया।

खुद किया मरम्मत कार्य का संकल्प

ग्रामीणों ने बाघ नाला और शोभा नाला की रपटों की मरम्मत में जुटे हुए हैं। गरहाडीह पंचायत के 100 से अधिक युवा इस कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हैं। जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि भूख हड़ताल के बाद प्रशासन ने मरम्मत की मंजूरी देने का जो आश्वासन दिया था, वह झूठा निकला।

बाघ नाला रपटा में आज ढाई मीटर चौड़ी और चार मीटर लंबी स्लैब की ढलाई की गई, जिसकी मोटाई 10 इंच से अधिक है। इससे पहले, शनिवार को गौर गांव के युवाओं ने भी इसी तरह का निर्माण कार्य किया था। सोमवार को कोकड़ी और गोना पंचायत के युवा बाकी कार्य पूरा करेंगे। वहीं, शोभा गांव के युवाओं ने भी शोभा नाला की मरम्मत कर दी है।

चंदा जुटाकर किया मटेरियल का इंतजाम

इस पहल को अंबेडकर वादी युवा संगठन ने अंजाम दिया है। संगठन के अध्यक्ष पतंग मरकाम, उपाध्यक्ष रोहन नेताम, सचिव नकुल नागेश और पुरुषोत्तम परदे ने बताया कि मरम्मत कार्य में श्रम के अलावा लगभग 5 लाख रुपये का सामग्री खर्च होगा। इलाके के 8 पंचायतों के लोगों ने एक बैठक करके मरम्मत का निर्णय लिया और एक वाट्सअप ग्रुप भी बनाया गया, जिसमें सामग्री की सूची रखी जा रही है।

सुरक्षा के लिए जरूरी मरम्मत

ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बारिश के दौरान रपटों के क्षतिग्रस्त होने से कई हादसे हो चुके हैं। 2021 में कोकड़ी पंचायत के आश्रित पारा डूमरबुडरा निवासी रामनाथ और उनकी पत्नी सुगनतीन बह गए थे। इसके अलावा, पिछले वर्ष स्कूली बच्चों के बह जाने की भी कई घटनाएं हुई थीं। ऐसे में, जान की सुरक्षा को देखते हुए ग्रामीणों ने जन सहयोग से मरम्मत का फैसला किया।

प्रशासनिक वादे अधूरे

जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि पिछले सप्ताह भूख हड़ताल के दौरान 10 सूत्रीय मांगों में रपटों की मरम्मत की मांग भी शामिल थी। प्रशासन द्वारा राशि मंजूर करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्य शुरू नहीं हुआ। 16 जून को स्कूल खुलने वाले हैं, इसलिए ग्रामीणों ने बच्चों की सुरक्षा के लिए खुद मरम्मत का कार्य आरंभ किया है।

उच्च स्तरीय पुलों की स्वीकृति

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना विभाग के एसडीओ कमलेश चंद्राकर ने जानकारी दी कि अड़गड़ी नाला पर 2.31 करोड़ और ज़रहीडीह नाला पर 2.26 करोड़ की लागत से उच्च स्तरीय पुलों की स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा, शोभा नाला के लिए 3.33 करोड़, बाघ नाला के लिए 2.41 करोड़ और गरहा बाघ नाला के लिए 3.47 करोड़ की प्रशासकीय मंजूरी भी प्राप्त हो चुकी है। हालांकि, गरहा बाघ नाला के लिए 2021 में ही मंजूरी दी गई थी, जिसका अब तक 9वीं बार टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। सभी कार्य पीडब्ल्यूडी की सेतु शाखा द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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