धान केंद्रों पर ‘जाम’: टोकन कटने के बाद भी नहीं बिक रहा धान, उठाव न होने से सैकड़ों किसान परेशान

खैरागढ़: छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के डोकराभाठा धान उपार्जन केंद्र में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। यहां लगातार तीसरे दिन भी धान की खरीदी पूरी तरह ठप रही, जिससे सैकड़ों किसानों का धैर्य जवाब दे रहा है। किसान अपनी उपज ट्रैक्टरों में लादकर केंद्र पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां जगह न होने की बात कहकर उन्हें वापस लौटाया जा रहा है। असल में केंद्र की कुल भंडारण क्षमता लगभग 62 हजार क्विंटल है, जबकि अब तक 66 हजार क्विंटल से ज्यादा धान खरीदा जा चुका है। फड़ पर जगह न बचने के कारण अब नया धान उतारना मुमकिन नहीं रह गया है। प्रशासन की ओर से सुचारू खरीदी के दावों के बीच डोकराभाठा की यह तस्वीर सरकारी इंतजामों की पोल खोल रही है।

परिवहन की सुस्त रफ्तार ने बढ़ाई मुसीबत: 66 हजार क्विंटल की खरीदी और उठाव सिर्फ एक ट्रक, फड़ पर लगा बोरियों का अंबार

इस पूरे संकट की मुख्य वजह खरीदी केंद्रों से धान का समय पर उठाव न होना है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 15 नवंबर से अब तक केंद्र में बंपर आवक हुई है, लेकिन परिवहन के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। अब तक महज एक ट्रक के जरिए करीब 2310 क्विंटल धान ही मिलों तक भेजा जा सका है। बाकी का सारा स्टॉक केंद्र में ही पड़ा है। समिति प्रबंधन का कहना है कि जब तक पुरानी बोरियां हटेंगी नहीं, तब तक नया धान तौलना संभव नहीं होगा। परिवहन व्यवस्था में इस बड़ी चूक के कारण पूरी चेन प्रभावित हो गई है और किसानों को कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे अपनी उपज की रखवाली करनी पड़ रही है।

प्रशासन को पहले ही दी गई थी चेतावनी: दिसंबर से पत्र लिख रहा है समिति प्रबंधन, अधिकारियों ने नहीं दिखाई गंभीरता

डोकराभाठा समिति के अध्यक्ष रामकुमार जोशी का कहना है कि यह समस्या अचानक पैदा नहीं हुई है। उन्होंने दिसंबर महीने से ही संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर धान उठाव तेज करने की गुहार लगाई थी। प्रतिदिन 40 से 45 टोकन जारी कर लगभग 7 हजार क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन परिवहन की गाड़ी पटरी से उतर गई। समिति ने जोखिम उठाकर एक के बाद दूसरा फड़ भी चालू किया ताकि किसानों को दिक्कत न हो, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण से बाहर है। अगर समय रहते ट्रकों की संख्या बढ़ाई जाती, तो आज किसानों को अपनी भरी हुई गाड़ियां लेकर वापस नहीं जाना पड़ता।

कागजी आंकड़ों और हकीकत में बड़ा अंतर: जिला प्रशासन के सुचारू दावों के बीच भटक रहे अन्नदाता, आर्थिक नुकसान का डर

जिला प्रशासन लगातार प्रेस विज्ञप्तियां जारी कर जिले की 39 समितियों और 51 केंद्रों में रिकॉर्ड खरीदी और करोड़ों के भुगतान के दावे कर रहा है। लेकिन डोकराभाठा केंद्र की जमीनी हकीकत इन सरकारी आंकड़ों को आईना दिखा रही है। टोकनधारी किसानों के लिए यह स्थिति सिर्फ मानसिक परेशानी नहीं, बल्कि सीधा आर्थिक नुकसान है। बार-बार ट्रैक्टर लेकर केंद्र आना और खाली हाथ लौटना उनके परिवहन खर्च को बढ़ा रहा है। इसके साथ ही खुले में रखे धान के खराब होने या वजन कम होने का खतरा भी लगातार बना हुआ है, जिससे किसान काफी चिंतित हैं।

धान की सुरक्षा और भुगतान पर संकट: समिति अध्यक्ष ने जताई असमर्थता, अब शासन के बड़े फैसले का इंतजार

स्थिति यह है कि अब समिति प्रबंधन ने आगे खरीदी जारी रखने से हाथ खड़े कर दिए हैं। प्रबंधन का कहना है कि जब तक भारी मात्रा में धान का उठाव शुरू नहीं होता, तब तक केंद्रों पर नई आवक संभालना मुमकिन नहीं है। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन और खाद्य विभाग पर टिकी हैं कि वे डोकराभाठा जैसे केंद्रों के लिए अतिरिक्त ट्रकों की व्यवस्था कब तक करते हैं। किसान संगठन भी अब लामबंद हो रहे हैं और चेतावनी दी जा रही है कि अगर जल्द ही तौल शुरू नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

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Ravi Pratap Pandey

रवि पिछले 7 वर्षों से छत्तीसगढ़ में सक्रिय पत्रकार हैं। उन्होंने राज्य के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर गहराई से रिपोर्टिंग की है। जमीनी हकीकत को उजागर करने और आम जनता की आवाज़ को मंच देने के लिए वे लगातार लेखन और रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

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