
बस्तर संभाग में इन दिनों जंगली जानवरों की मौजूदगी को लेकर कई तरह के वीडियो चर्चा का विषय बने हुए हैं। ताजा मामला बारसूर मार्ग का है, जहां रात के अंधेरे में सड़क के बीचों-बीच बैठे एक तेंदुए का वीडियो तेजी से प्रसारित हुआ। इस वीडियो ने उस वक्त और भी ज्यादा सुर्खियां बटोरीं जब खुद प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने इसे अपने फेसबुक पेज पर साझा किया। उन्होंने इसे “बारसूर मार्ग में तेंदुए का शानदार दृश्य” करार दिया, जिसके बाद पूरे इलाके के ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया।
वन विभाग ने दावों को नकारा
वीडियो के वायरल होते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हुई और इसकी वास्तविकता की जांच की गई। जांच के बाद विभागीय अधिकारियों और सीसीएफ (CCF) ने इस फुटेज को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है। विभाग का कहना है कि यह वीडियो बस्तर क्षेत्र का है ही नहीं और न ही बारसूर मार्ग पर हाल ही में ऐसी कोई गतिविधि दर्ज की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह के भ्रामक वीडियो किसी अन्य स्थान के होते हैं, जिन्हें स्थानीय नाम देकर गलत तरीके से फैलाया जाता है।
भ्रामक खबरों पर होगी कड़ी कार्रवाई
वन विभाग के अधिकारी आलोक तिवारी ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर पुरानी या बाहरी फुटेज वायरल कर जनता के बीच डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। विभाग अब ऐसे लोगों की पहचान कर रहा है जो सोशल मीडिया पर अफवाहें फैला रहे हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि वन्यजीवों से जुड़ी गलत जानकारी साझा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वे बिना जांचे-परखे ऐसी किसी भी खबर पर भरोसा न करें।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब बस्तर में वन्यजीवों को लेकर गलत जानकारी सामने आई हो। कुछ दिनों पहले भी वन मंत्री ने एक बाघ के रेस्क्यू का वीडियो साझा किया था, जिसे बाद में एसडीओ (SDO) ने फर्जी बताया था। लगातार हो रही इन चूक के बाद अब सोशल मीडिया हैंडलिंग पर सवाल उठ रहे हैं। विभाग ने नागरिकों को सुझाव दिया है कि वे किसी भी संदिग्ध जानवर के दिखने पर सीधे कंट्रोल रूम या नजदीकी वन चौकी को सूचित करें, न कि सोशल मीडिया के दावों को सच मानकर दहशत में आएं।



