
Keshkal Bypass Ghotala: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले से प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। केशकाल घाटी में राष्ट्रीय राजमार्ग के बायपास निर्माण के नाम पर वन विभाग ने 8,159 पेड़ों की कटाई कर दी। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जमीन पर ये पेड़ काटे गए, वहां बायपास का अलाइनमेंट ही नहीं था। यानी जिस जगह सड़क बननी ही नहीं थी, वहां के हरे-भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी गई। मामला उजागर होने के बाद अब संबंधित विभागों में हड़कंप मचा हुआ है।

एक दशक से लंबित पड़ा है प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2016 में हुई थी। तब केशकाल घाटी में ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया था। काम शुरू भी हुआ, लेकिन लगभग 3 फीसदी निर्माण के बाद ठेकेदार काम बीच में ही छोड़कर भाग गया। तब से यह प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ था। हाल ही में दुर्ग के एक नए ठेकेदार को इस काम का टेंडर दिया गया, जिसके बाद हुए सर्वे में इस बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ।
गलत नक्शे पर चली वन विभाग की कुल्हाड़ी
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि पेड़ों की कटाई उस रूट पर कर दी गई जिसकी तकनीकी मंजूरी ही नहीं थी। बायपास का जो अलाइनमेंट कागजों पर तय था, कटाई उससे हटकर की गई। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि बिना किसी पुख्ता योजना और नियमों को ताक पर रखकर यह कार्रवाई की गई। इस गलती की वजह से न केवल सरकारी धन की बर्बादी हुई, बल्कि पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति पहुंची है।

2.75 करोड़ रुपये के लेन-देन पर गहराया शक
सूत्रों के अनुसार, पेड़ों की कटाई के बदले करीब 2.75 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया। अब जांच का विषय यह है कि जब अलाइनमेंट गलत था और मंजूरी नहीं थी, तो यह भुगतान किस आधार पर हुआ। यह आशंका जताई जा रही है कि इस वित्तीय अनियमितता को लंबे समय तक दबाकर रखा गया। विभागीय मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई और करोड़ों का लेनदेन संभव नहीं लग रहा है।
एनएच और वन विभाग की संदिग्ध भूमिका
इस पूरे प्रकरण में निर्माण एजेंसी और वन विभाग दोनों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग गए हैं। आरोप है कि पेड़ों को काटने से पहले जो अनिवार्य अनुमति प्रक्रिया होती है, उसमें भारी विसंगतियां बरती गईं। यह सिर्फ एक प्रशासनिक भूल नहीं बल्कि एक सोची-समझी लापरवाही नजर आ रही है। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करना भी जरूरी नहीं समझा कि जिस जमीन पर पेड़ काटे जा रहे हैं, वह आधिकारिक तौर पर प्रोजेक्ट का हिस्सा है भी या नहीं।
वन मंडल अधिकारी ने मानी अलाइनमेंट में गलती
केशकाल की वन मंडल अधिकारी दिव्या गौतम ने पुष्टि की है कि सर्वे में बड़ी चूक हुई है। उन्होंने बताया कि कलेक्टर के साथ फील्ड दौरे के दौरान यह पाया गया कि करीब 4 से 5 किलोमीटर के दायरे में गलत अलाइनमेंट पर पेड़ काट दिए गए हैं। विभाग अब नए सिरे से सर्वे और मार्किंग कर रहा है। एनएच (NH) विभाग के अधिकारियों को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया है और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं।

लापरवाह अधिकारियों पर गिर सकती है गाज
शासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। री-सर्वे का काम अगले 5-6 दिनों में पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद करीब 5,000 से 6,000 और पेड़ों की कटाई की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक बड़ा धब्बा बनकर उभरा है।
5 हजार लोगों की सालभर की ऑक्सीजन का नुकसान
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, 8,159 पेड़ों की कटाई एक छोटे जंगल को खत्म करने जैसा है। एक स्वस्थ पेड़ सालभर में लगभग 100 से 120 किलो ऑक्सीजन देता है। इस हिसाब से देखें तो इन पेड़ों के कटने से करीब 9 लाख किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन रुक गया है। यह मात्रा लगभग 4,000 से 5,000 लोगों की सालभर की सांसों की जरूरत के बराबर है। यह नुकसान सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि सीधे तौर पर मानव जीवन और जैव विविधता पर किया गया प्रहार है।



